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एक असल शिकारी का बदला एक छोटे से गांव में

Title: एक असल शिकारी का बदला

एक छोटे से गांव में एक शिकारी रहता था। वह एक असली शिकारी था जो अपनी शिकारी कुशलता के लिए जाना जाता था। अपनी शिकारी से वह अपने परिवार का ख्याल रखता था। वह चाहता था कि उसका परिवार खुश रहे और उसे जो भी खर्च करना हो, वह ढंग से कर सके।

एक दिन उसने अपनी नजर में एक ख़तरनाक जानवर को देखा जो उसके गांव के नजदीकी जंगल में रहता था। शिकारी को इस जानवर का पता लगा और उसने सोचा कि उसे शिकार करके उसका बढ़ावा अच्छा होगा। उस जानवर को शिकार करना आसान नहीं था लेकिन परशुराम शिकारी ने उसे कुशलतापूर्वक पकड़ लिया। उसने अपनी शिकार का निशाना लगाया और जानवर की जान लेंद से उसे मार डाला। परशुराम शिकारी के सामने उसी वक्त ये बात सही हो रही थी।

जैसे ही उसने शिकार को मार डाला, उसके सामने एक बड़ा सा जानवर आ गया। ये जानवर नहीं दिखा पा रहा था, लेकिन उसकी आँखें भय से भरी थीं। परशुराम शिकारी ने इस जानवर को भी शिकार करना शुरू किया। लेकिन इस जानवर की कोई खतरनाक झटका नहीं हुआ। उसे लगता था कि शायद उसने हटा नहीं जो जानवर होना चाहता था। लेकिन इस दिन कुछ अलग हो रहा था।

बड़ी मुश्किल से जानवर के पास जाने के बाद, उसने जानवर की तलाश की। उसे कुछ नहीं मिला। फिर बिना बताए उस शिकार को छोड़ दिया। वह यह सोचता रह गया कि उसके शायद शिकारी के कहने से कोई बड़ा सा जानवर जल्द ही उसे मिल जाए।

थोड़ी देर होने के बाद, परशुराम ने एक नया जंगल ढूंढ लिया। इस जंगल में बहुत से जानवर थे जिनका शिकार करना भी आसान था। लेकिन उसने शिकार करने से इनकार कर दिया। उसे एक अजीब सी जानकारी मिली जो उसे उत्सुक बनाने लगी। वह फिर से वो जंगल तलाश रहा था जहाँ उसने उसेजानवर को देखा था।

तीन दिन बीत गए लेकिन उसे कुछ नहीं मिला। वह थक गया था लेकिन अभी भी उसका जानवर नहीं मिला था। एक दिन उसे कुछ लगा कि कोई उसे नजदीक आ रहा है। उसने इसे नजरअंदाज कर दिया और उसी जंगल में चला गया जहाँ उसने उस किसीजानवर को देखा था।

थोड़ी देर में जब परशुराम शिकारी जंगल में चल रहा था, तभी एक और शिकारी ने उसे बांध दिया। उस अन्य शिकारी ने उसे बांध दिया था क्योंकि उसे परशूराम के सामने आने से पहले ही उसकी जान मार डाली गई थी। जब परशुराम बांधा गया था, तो उसने इसे हल्के से लिया था। वह ये समझ नहीं पाया कि क्यों उसे बांधा गया है।

परशुराम शिकारी बांधे से बार-बार उठने की कोशिश करता रहा था लेकिन उसे उतर नहीं पाया। फिर गाँव के तमाम लोग जुट गए थे जो समझते थे कि शिकारी को कोई दुष्कर्म कर गया है। लेकिन परशुराम का परिवार उसे ढूंढ रहा था। उसकी पत्नी और बच्चे उसे वापस लेने आए थे।

उन्होंने इस मुश्किल हालात को देखकर रोया था और कहा था कि मैं नाश नहीं होने दूंगा। और यही उसकी लड़ाई शुरू हुई। वह अपने शिकारी कुशलताओं को उपयोग में लेकर नए जंगलों में गया जहाँ उसने पहली बार उसे जानवर को देखा था।

उसे पता चला कि उस शिकार को शायद उन लोगों ने अंजाम दिया है जो उसे बांध लिया था। परशुराम ने इस बात को दुनिया तक पहुंचाना था। उसने फैसला किया कि वह शांति दूतों का साथ वापस आ जाएगा और उसको बस पता नहीं चलता होगा कि उसे इस मुश्किल में उसका परिवार जो इंतजार कर रहा होता वह अब उसको ढूंढेगें नहीं।

फिर उस जानवर को ढूँढते हुए उसने अगले कुछ दिनों में उसे ढूँढ लिया। उसने सोंचा कि उस शिकार को अपने हाथों से शिकारित करने का संकल्प जिस दिन से उसे बांध लिया गया था, वह उसे पूरा करने का होता है।

वह शांति दूतों की मदद से उस जंगल तक पहुँच गया जहां शिकार किया जाता था। उसने उस जानवर को ढूँढ़ लिया और उसको शिकारित किया। उसने इस बात का बदला लेना था और आज वह उससे बदला लिए देख रहा था।

कुछ देर बाद, उसको अपने परिवार के लिए फिर दिन भर शिकार करने की जरूरत नहीं थी। उसे अपनी कुशलता के लिए याद रखा जाता था और उस संकल्प को पूरा करते हुए वह अपने गांव वापस आ गया।

उसका भारत में एक बड़ा प्रभाव हुआ था। उसको लोग पूरे देश में पहचानने लगे थे और उसे छेड़ने वाले शिकारी उससे ग्रस्त हो गए थे। लेकिन उसका संकल्प अपने शिकार कुशलताओं को उन्हें दिखाना नहीं था, बल्कि अपने और अपने परिवार के लिए जीवन शैली बनाने के लिए अपने संकल्प के साथ जीतने के लिए था।

कागा जी

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