Title: विश्वासघात (Betrayal)
राम अपने साथियों के साथ ठेकेदार की दुकानों के लिए शहर के पुलिस थाने जा रहा था। ठीक ऐसे ही जंगल में कुछ गुंडों ने उन्हें घेर लिया। जंगल में अपने घुड़सवारों को संभालना काफी कठिन होता है। गुंडे उन्हें घेरते हुए उनका हथियार ले लिया और उनके साथ हंस पड़े। राम को बेहोशी आ गई। जब वह संभला तो उसने देखा कि उसके साथ साथियों के हाथ भी बंधे हुए थे। वह जानता था कि अगले कुछ दिनों तक वे साथियों की मुक्ति के लिए एक बड़ी रकम देनी होगी।
वे गुंडों का चेहरा तो देख रहे थे, लेकिन उनमें से किसी को पहचान नहीं पा रहे थे। ठंडे स्वयं को सामने बैठे गुंडों के सामने थोड़ा झुका लिया और उनसे थोड़ी देर बात की। कुछ ही देर में वह उन से मालूम करता है कि उनका बंधन संभवतः अपने ठेकेदार की दुकानों से संबंधित है। उन्हें पठान नाम की एक गुप्त संस्था से संपर्क करना होगा।
दो दिन के बाद राम वापस इसी ठेकेदार की दुकान पर गया। वह अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा और उन्हें पठान नाम की संस्था से संपर्क करने के लिए बताया। ठेकेदार ने उन्हें वहाँ अपने काम के लिए तैयार करते हुए कुछ स्वरों में विश्वासघात की बात बताई। राम का साथी उसे ऐसे बेचारे ढंग से देख रहे थे, जैसे उन्हें सब समझ में आ रहा हो। राम ने ठेकेदार को उनके साथियों के बंधन की खबर दी।
“तुम्हें अपने साथियों के लिए ३० लाख देने होंगे।” ठेकेदार ने कहा। “लेकिन मैं तुम्हारी ये मदद उस स्थान से करूँगा, जहाँ से तुम्हें पता चले कि तुम उनके साथ बंधे हुए हो।”
राम ने सहमाकर पूछा, “क्या ये एक मजाक है?”
“जी नहीं, ये बिलकुल सच है।” ठेकेदार ने उत्तर दिया। “तुम्हारे साथियों को इसे खोलने के लिए टाइम होगा। मैंने उनसे वादा कि है कि मैं उन्हें सुरक्षित रखूँगा जब तक तुम पता नहीं लगाते कि वे कौन हैं और किसके साथ संबंधित हैं।”
राम और उसके समर्थक थोड़ी देर सोचने के बाद उसे विश्वासघात करने का ठीक टाइम समझते हुए स्वीकार कर लिया।
हफ्ते भर बाद वे ३० लाख देने के लिए वापस करने वाले थे। उन्होंने ठेकेदार को उसी स्थान पर पैसे दे दिए। उसी दिन उनके साथियों ने उन्हें समझाया कि वे उनका फायदा उठाने की कोशिश में थे। इससे पहले राम ने कभी नहीं सोचा था कि उसके सबसे विश्वासघाती मित्र उसके साथियों में से होंगे।
वे अपने साथियों की चाल में आ गए थे और उससे अपनी तबियत में भी लापरवाह हो गए थे। उन्होंने जो विश्वासघात किया था, उसने उन्हें अब ये भी नहीं सोचने दिया कि वह ठीक हो या नहीं।