Story Title: राजा और तीन बेटियां
एक बहुत समृद्ध राजा था जिसे तीन बेटियां थीं। इन तीनों बेटियों की उम्र लगभग एक समान थी। उन तीनों बेटियों का नाम मानी, नीती और नितिका था।
राजा बहुत खुश था जब उन्होंने जाना कि उनकी पत्नी फिर से गर्भवती हैं। राजा का सपना एक बेटे के साथ था जिसे वह अपनी संपत्ति का वारिस बनाना चाहता था। लेकिन इस बार, उन्हें एक बेटी हुई।
राजा के मन में उसकी डिसाप्वेंटमेंट की भावना थी। वह अपने दोस्तों से इस बात पर शिकायत करने लगा कि उसे एक बेटी हुई है। अब उसे अपनी संपत्ति का वारिस छोड़ना होगा। राजा ने अपनी पत्नी से नहीं बात की और अपने दोस्तों से चुप रहा जो उसी तरह औरतों को तुच्छ मानते थे।
देर रात राजा को एक सपना आया जिसमें एक बूढ़ा आदमी उससे कुछ अजीब सीख देने के लिए आया। राजा ने अपने सपने में से उन शब्दों का अर्थ नहीं समझा लेकिन उसे यह समझ में आया कि उसके तीन बेटियों की प्रति उसने किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करना होगा।
राजा को उस दिन से अपनी धृष्टता पर खेद हुआ। उसने अपनी तीनों बेटियों से मन की बात कही और उन्हें एक समान दिल से चाहने लगा।
दिन बीत रहा था, नीती के आवास में एक सहज वातावरण था। सभी मीठे-मीठे भोजन का आनंद ले रहे थे। रिया मासी बोली, “आरे यार, किसी भी भाषा में तो कहते हैं कि ‘गर्भवती महिला दो लोगो के लिए खात्म होती है: स्वयं के लिए तथा अपने बच्चे के लिए’।”
यह बातों से नितिका के मन में एक विचार आया। उसने राजा से अपनी अभिव्यक्ति के लिए अनुमति मांगी।
नितिका ने कहा, “पापा, एक गर्भवती महिला को अगर एक बेटा होता है तो उसे बहुत सारा दुख झेलना पड़ता है, क्योंकि लोग उसे छोटा-सा मानते हैं। इस सोच का हमें तुरंत अंत कर देना चाहिए और लड़के-लड़की में भेदभाव नहीं करना चाहिए।”
राजा बहुत सोचने-समझने के बाद सहमत हुए और अपने तीनों बेटियों को भलीभांति पालने लगे। उन्होंने उन्हें एक समान शिक्षा और संरचना का विकल्प दिया। उन तीनों बेटियों ने जीते-जगाते दुनिया को यह संदेश दिया कि लड़के और लड़कियों में भेदभाव की कोई जगह नहीं है।
समय बीतता रहा, नौकर राजा को एक खुराक ज्योतिष से परे एक खराब से नुस्खा देने आया। उसने राजा से कहा कि यह नुस्खा आपकी कोई भी समस्या को दूर कर देगा। राजा ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया लेकिन उसने उस नुस्खे को नीती और नितिका को स्वादिष्ट व्यंजन के रूप में देना चाहा।
राजा की पत्नी बहुत कंजूस थी और इसे सोच कर उसने राजा से अपने टुकड़ों के लिए एक साधारण व्यंजन बनाने की मांग की। जब नीती और नितिका को पता चला तो वे राजा के साथ खुश नहीं थे लेकिन उन्हें इस बात का पता नहीं था कि लड़कियों को उनकी हक मांगने के लिए संघर्ष करना चाहिए या नहीं।
नीती और नितिका ने खाने से मना कर दिया और उन्होंने राजा को अधिसूचित किया कि वे उनके साथ नहीं खाएंगे। राजा से कहा गया कि लड़की अपनी इच्छा अनुसार जीवन जीने का अधिकार रखती है।
राजा ने इन विचारों को मन में समझ लिया और खुद नेतृत्व करते हुए न्याय के साथ खुशी और प्रगति का सन्देश दिया। अब राजा ने अपनी तीनों बेटियों को महत्त्वपूर्ण स्थान दिया।
इस कहानी क्षमता और संघर्ष का संदेश देती है जो हमें अपने जीवन में उपयोगी हो सकता है। हमें हमारे जीवन में इस तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए ताकि हम और हमारे अस्तित्व को सशक्त बना सकें।