नमस्कार दोस्तों! ‘काक-वाणी’ के विशेष स्तंभ ‘WhatsApp यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। आज हम बात करेंगे ज्ञान के उस महासागर की, जिसके गोताखोर सुबह-सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ के साथ सीधे आपके इनबॉक्स में उतरते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं उन वायरल दावों की, जिन्हें पढ़कर खुद अल्बर्ट आइंस्टीन भी अपनी कब्र में करवटें बदल रहे होंगे और सोच रहे होंगे कि उन्होंने भौतिकी की पढ़ाई में अपनी जिंदगी क्यों बर्बाद की।
यूनेस्को का ‘सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ और नासा की शंख-खोज
हर साल कम से कम तीन बार यूनेस्को (UNESCO) हमारे राष्ट्रगान को दुनिया का ‘सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित करता है। यह अलग बात है कि पेरिस में बैठे यूनेस्को के अधिकारियों को इस बात की भनक तक नहीं होती। लेकिन हमारे WhatsApp के कुलपति इस बात को पूरे जोश के साथ फॉरवर्ड करते हैं। इसके बाद बारी आती है नासा (NASA) की। नासा के वैज्ञानिक ब्रह्मांड के रहस्यों को खोजना छोड़कर सिर्फ यही ढूंढते रहते हैं कि सूर्य से ‘ॐ’ की आवाज आ रही है या फिर अंतरिक्ष में शंख बज रहा है। इन संदेशों को पढ़कर ऐसा लगता है कि नासा का मुख्यालय वाशिंगटन में नहीं, बल्कि हरिद्वार के किसी पावन घाट पर स्थित है।
इलायची से कैंसर का इलाज और पत्तागोभी में प्लास्टिक
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने दशकों की रिसर्च के बाद भी कैंसर का सटीक इलाज नहीं ढूंढ पाया, लेकिन हमारे ‘पारिवारिक ग्रुप’ के परम ज्ञानियों ने इसे सुबह खाली पेट दो हरी इलायची और गुनगुने पानी से ठीक कर दिखाया है। वायरल मैसेजेस की मानें तो डॉक्टर तो बस आपसे पैसे लूटने के लिए डिग्री लेकर बैठे हैं, असली इलाज तो आपकी रसोई के डिब्बों में बंद है। और हां, पत्तागोभी में ‘प्लास्टिक’ होने का दावा तो इतना वायरल हुआ कि लोगों ने हरी सब्जियां छोड़कर समोसे खाना शुरू कर दिया, क्योंकि मैदा तो कम से कम ‘नेचुरल’ है!
बिना सोचे-समझे ‘फॉरवर्ड’ करने की कड़वी सच्चाई
इन तमाम दावों की कड़वी सच्चाई यह है कि इनका हकीकत से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता। ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’ का टैग इस बात की गारंटी नहीं है कि खबर सच है, बल्कि यह इस बात का जीवित प्रमाण है कि समाज में मुफ्त इंटरनेट पाने वाले और खाली बैठे लोगों की तादाद कितनी ज्यादा है। अगली बार जब आपके पास ‘इस संदेश को 11 लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी’ वाला संदेश आए, तो कृपया अपने अंगूठे को थोड़ा आराम दें। देश का भला विवेक और विज्ञान से होगा, अंधविश्वास के फॉरवर्ड से नहीं।