WhatsApp यूनिवर्सिटी के कुलपति, कुलसचिव और परम पूजनीय ‘फॉरवर्ड वीरों’ ने मिलकर एक नया ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब देश में किसी भी वायरल खबर को सच साबित करने के लिए किसी तर्क, विज्ञान या सरकारी एजेंसी के प्रमाण की आवश्यकता नहीं होगी। यूनिवर्सिटी के नए ‘फैक्ट चेक’ नियम आ चुके हैं, जिन्होंने दुनिया भर के बुद्धिजीवियों और वैज्ञानिकों को सकते में डाल दिया है।
नया नियम: ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ ही परम सत्य है
नए दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि कोई संदेश आपकी पारिवारिक चैट (Family Group) पर पांच से अधिक बार ‘Forwarded many times’ के टैग के साथ तैरता हुआ आता है, तो वह स्वतः ही ब्रह्मांड का अकाट्य सत्य बन जाता है। अब नासा (NASA) को अंतरिक्ष से दिवाली के दिन भारत कैसा दिखता है, इसकी सैटेलाइट तस्वीर जारी करने की कोई जरूरत नहीं है; हमारे फूफाजी की मोबाइल गैलरी में वह चमचमाती तस्वीर पहले से ही प्रमाणित होकर सुरक्षित है।
इमोशनल ब्लैकमेल = 100% सत्यता की गारंटी
फैक्ट-चेक की इस नई स्वदेशी तकनीक में सबसे महत्वपूर्ण पैमाना ‘इमोशनल ब्लैकमेल’ को माना गया है। अगर किसी मैसेज के अंत में लिखा है—‘इसे इतना शेयर करो कि भ्रष्टाचारियों की नींद उड़ जाए’ या ‘99% लोग इसे इग्नोर कर देंगे, लेकिन एक सच्चा देशभक्त इसे जरूर शेयर करेगा’, तो उसकी सत्यता पर सवाल उठाना सीधे तौर पर महापाप माना जाएगा। जितना ज्यादा देशप्रेम का तड़का और रोना-धोना होगा, खबर उतनी ही प्रामाणिक मानी जाएगी।
यूनेस्को (UNESCO) का नया काम: रोज नए सर्टिफिकेट बांटना
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यूनेस्को के पास अब दुनिया के ऐतिहासिक धरोहरों को संभालने के अलावा केवल एक ही काम बचा है—हर दूसरे दिन भारतीय राष्ट्रगान, हमारे राष्ट्रीय त्योहारों या हमारी सड़कों को ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करना। यदि आपके पास ऐसा कोई मैसेज आया है, तो मान लीजिए कि पेरिस में बैठे यूनेस्को के अधिकारियों ने रात-रात भर जागकर केवल आपके व्हाट्सएप ग्रुप के लिए यह सर्टिफिकेट तैयार किया है।
निष्कर्ष: तर्क करना वर्जित है, फॉरवर्ड करना ही धर्म है
इस नए फैक्ट-चेक सिस्टम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें आपको अपने दिमाग पर बिल्कुल भी जोर नहीं देना पड़ता। बस सुबह उठिए, चाय की चुस्की के साथ चमकीले गुलाब वाले ‘गुड मॉर्निंग’ संदेश से शुरुआत कीजिए और दिनभर बिना सोचे-समझे ज्ञान की गंगा बहाते रहिए। याद रखिए, तर्क करना कमजोरी की निशानी है और बिना सोचे ‘शेयर’ का बटन दबाना ही परम ज्ञान है!