WhatsApp यूनिवर्सिटी के अद्भुत शोध: यूनेस्को ने फिर घोषित किया भारत को सर्वश्रेष्ठ!

स्वागत है आपका ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड में, जहां हम सीधे ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के उस ज्ञान-भंडार की सैर करेंगे, जिसके आगे हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड भी घुटने टेकते नजर आते हैं। सुबह उठते ही चाय की चुस्की के साथ जब तक मोबाइल पर तीन-चार ‘अल्ट्रा-लेवल’ के वायरल संदेश न मिलें, तब तक हमारे देश के प्रबुद्ध नागरिकों का दिन शुरू नहीं होता। आइए, आज कुछ ऐसे ही वायरल ‘तथ्यों’ का पोस्टमार्टम करते हैं।

यूनेस्को का साप्ताहिक पुरस्कार समारोह

इस हफ्ते का सबसे बड़ा वायरल सच (व्हाट्सएप के अनुसार) यह है कि यूनेस्को (UNESCO) ने भारतीय राष्ट्रगान, हमारे राष्ट्रीय ध्वज और हमारे पड़ोस वाले शर्मा जी के संस्कारी बेटे को दुनिया में ‘सर्वश्रेष्ठ’ घोषित किया है। हैरानी की बात यह है कि यूनेस्को के पेरिस मुख्यालय को खुद नहीं पता कि वह हर हफ्ते भारत को कोई न कोई नया पुरस्कार दे रहा है। जब हमने इस WhatsApp Viral Fact Check की तहकीकात की, तो पता चला कि यूनेस्को वाले खुद परेशान हैं कि उनके नाम पर कौन इतनी ट्राफियां बांट रहा है। लेकिन चूंकि मैसेज पर ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ का टैग लगा है, तो भाई सच ही होगा! आखिर हमारे फूफा जी गलत जानकारी थोड़े ही फैलाएंगे?

नासा की नींद उड़ाने वाले घरेलू नुस्खे

दूसरा अद्भुत सच यह तैर रहा है कि नासा (NASA) के वैज्ञानिकों ने मान लिया है कि सुबह उठकर तांबे के लोटे में पानी पीने से कंप्यूटर वायरस भी ठीक हो जाते हैं। व्हाट्सएप के अनुसार, नासा वाले रात-दिन अपनी स्पेस रिसर्च छोड़कर केवल भारतीय रसोई में रखी हल्दी, अदरक और अजवाइन पर रिसर्च कर रहे हैं। इस महा-शोध का परिणाम यह निकला कि नासा के वैज्ञानिक अब मंगल ग्रह पर जाने के बजाय हमारे ताऊ जी के बताए काढ़े की रेसिपी नोट कर रहे हैं। तथ्य यह है कि नासा वालों को इस बात की भनक भी नहीं है, और वे बेचारे अब भी स्पेस में एलियंस ढूंढ रहे हैं, जबकि असली एलियंस तो व्हाट्सएप ग्रुप्स में एडमिन बने बैठे हैं।

१० लोगों को भेजें और करोड़पति बनें

और हां, उस चमत्कारिक संदेश को कैसे भूल सकते हैं जिसमें लिखा होता है, “इस दिव्य संदेश को तुरंत १० लोगों को भेजें, शाम तक कोई बहुत बड़ी खुशखबरी मिलेगी। एक व्यक्ति ने इसे डिलीट कर दिया, तो उसका चलता हुआ फोन पानी की बाल्टी में गिर गया।” इस वैज्ञानिक सत्य को चुनौती देने की हिम्मत आज तक अल्बर्ट आइंस्टीन भी नहीं कर पाए। हमने जब इसकी जांच की तो पता चला कि १० लोगों को यह कचरा भेजने से सिर्फ एक ही ‘खुशखबरी’ मिलती है—सामने वाले मित्र द्वारा आपको हमेशा के लिए ‘ब्लॉक’ कर देना!

निष्कर्ष: आंखें बंद, फॉरवर्ड चालू

तो हे ज्ञान-पिपासुओं! अगली बार जब आपके इनबॉक्स में कोई ऐसा संदेश आए जिसमें लिखा हो कि “इसे इतना फैलाओ कि पूरी दुनिया हिल जाए,” तो कृपया दुनिया को स्थिर रहने दें और अपने अंगूठे को थोड़ा आराम दें। व्हाट्सएप पर तैरने वाला हर पीला संदेश सोना नहीं होता। ज्ञान बांटिए, लेकिन थोड़ा विवेक इस्तेमाल करके, वरना ‘काक-वाणी’ तो कांव-कांव करके सच बताती ही रहेगी!

कागा जी