WhatsApp यूनिवर्सिटी का नया नियम: जो फॉरवर्ड पांच बार आए, वही परम सत्य है!

भारत के सबसे बड़े और सबसे सक्रिय शैक्षणिक संस्थान, यानी ‘WhatsApp यूनिवर्सिटी’ ने हाल ही में अपने शोधार्थियों के लिए एक नया ‘फैक्ट-चेक’ गाइडलाइन जारी किया है। अब तक आप लोग अल्बर्ट आइंस्टीन, यूनेस्को और नासा के हवाले से आने वाली खबरों को ऐसे ही सच मान लेते थे, लेकिन अब इस प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और ‘फॉरवर्ड-फ्रेंडली’ बना दिया गया है।

नया नियम: ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’ ही असली सत्य है

यूनिवर्सिटी के कुलपति (जो आपके मोहल्ले के सबसे खाली पीली अंकल हैं) ने स्पष्ट किया है कि गूगल के थकाऊ फैक्ट-चेकर्स की अब कोई जरूरत नहीं है। अगर किसी मैसेज के ऊपर ‘Forwarded many times’ का लेबल लगा है, तो वह अपने आप में एक अकाट्य सत्य बन जाता है। इस लेबल का मतलब है कि इस खबर को कम से कम दस लाख लोगों ने बिना दिमाग लगाए आगे बढ़ाया है। और भला इतने सारे लोग बिना दिमाग के कैसे हो सकते हैं? (कृपया इस सवाल का जवाब न ढूंढें)।

सत्यता जांचने के नए स्वर्ण मानक (Golden Standards)

नए फैक्ट-चेक मैन्युअल के अनुसार, किसी भी खबर को सच मानने के लिए निम्नलिखित तीन पैमानों पर खरा उतरना होगा:

१. देशभक्ति का तड़का: अगर खबर में लिखा है कि यूनेस्को ने भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का सबसे बेहतरीन राष्ट्रगान घोषित किया है, तो इसे बिना सोचे-समझे सच मान लें। जो इसका प्रमाण मांगेगा, उसे सीधे ग्रुप से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इससे आसान फैक्ट-चेक भला और क्या हो सकता है?

२. कसम और आशीर्वाद का गणित: “इस मैसेज को ११ लोगों को भेजें, शाम तक शुभ समाचार मिलेगा।” नया नियम कहता है कि यह पूरी तरह विज्ञान सम्मत है। अगर आपने इसे नहीं भेजा और आपके चाय का कप टूट गया, तो यह इसी नियम की अवहेलना का दुष्परिणाम है।

३. नासा की सैटेलाइट तस्वीरें: दिवाली की रात नासा द्वारा ली गई भारत की वह चमचमाती रंग-बिरंगी तस्वीर, जिसमें पूरा देश दीयों से जगमगा रहा है, वह हमेशा सच ही रहेगी। भले ही नासा चीख-चीख कर कहे कि वह ग्राफिक्स है, पर नासा वालों को क्या पता, उन्होंने दिवाली थोड़े ही मनाई है!

फैक्ट-चेकर्स के लिए कड़ी चेतावनी

यूनिवर्सिटी ने चेतावनी दी है कि जो लोग तर्क, विज्ञान या सरकारी वेबसाइटों के लिंक भेजकर बहती हुई अफवाहों की पवित्र गंगा को प्रदूषित करने की कोशिश करेंगे, उन्हें तुरंत ब्लॉक कर दिया जाएगा। सच वह नहीं है जो वास्तव में घटित हुआ है, बल्कि सच वह है जो आपके फूफाजी ने सुबह ६ बजे ‘गुड मॉर्निंग’ के गुलाब के फूल वाली इमेज के तुरंत बाद भेजा है। इसलिए, संशय मत कीजिए, बस फॉरवर्ड बटन दबाते रहिए!

कागा जी