सुबह के ठीक छह बजे जब आप अपनी नींद की आखिरी और सबसे हसीन किश्त पूरी कर रहे होते हैं, तभी आपके फोन की घंटी बजती है। घबराइए मत, कोई आपातकाल नहीं है। यह तो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के कुलपति, यानी आपके अपने फूफाजी का ‘सुप्रभात’ संदेश है, जिसके साथ एक अत्यंत ‘गोपनीय’ वैज्ञानिक शोध भी संलग्न है। दावा है कि “सुबह उठकर गरम पानी में नींबू निचोड़कर पीने से ना केवल कैंसर ठीक होता है, बल्कि इंसान सीधे अंतरिक्ष की सैर भी कर सकता है।”
यूनेस्को का ‘सर्वश्रेष्ठ’ वाला शाश्वत वरदान
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की सबसे प्रिय संस्था है—’यूनेस्को’। इस बेचारी वैश्विक संस्था के पास दुनिया में और कोई काम हो या न हो, लेकिन वह हर हफ्ते भारत की किसी न किसी चीज को ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करने के लिए चौबीसों घंटे तैयार बैठी रहती है। कभी हमारा राष्ट्रगान सर्वश्रेष्ठ घोषित होता है, तो कभी हमारे देश की सड़कें। हद तो तब हो गई जब पिछले दिनों दावा किया गया कि यूनेस्को ने भारत के हर व्हाट्सएप यूजर को ‘दुनिया का सबसे बुद्धिमान नागरिक’ घोषित कर दिया है। वैसे, इस दावे को सच मानने वालों की बुद्धि देखकर यूनेस्को के असली अधिकारी खुद अपना मुख्यालय बंद करने की सोच रहे होंगे।
नासा के कैमरे और दिवाली की जगमगाहट
इस फर्जी ज्ञान की दुनिया में दूसरी सबसे व्यस्त संस्था है ‘नासा’। नासा के वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशालाओं को छोड़कर केवल भारत की दिवाली का इंतजार करते हैं। हर साल दिवाली की रात नासा का उपग्रह सीधे भारत के ऊपर आकर रुक जाता है ताकि वह अंतरिक्ष से एक ऐसी रंग-बिरंगी तस्वीर ले सके जिसमें हमारा देश दीयों की रोशनी से जगमगा रहा हो। हकीकत यह है कि वह तस्वीर असल में एक साधारण ग्राफिक्स डिज़ाइन होती है, जिसे किसी फुर्सतबाज कंप्यूटर ऑपरेटर ने बनाया होता है। लेकिन हमारे व्हाट्सएप ग्रुप्स के वैज्ञानिकों के लिए यह सीधे ब्रह्मांड से आया साक्षात सत्य है।
‘फॉरवर्डेड ऐज़ रिसीव्ड’ का अचूक रक्षा कवच
इस फर्जी साम्राज्य का सबसे बड़ा रक्षा कवच है—”इसे अधिक से अधिक फॉरवर्ड करें ताकि देश बच सके।” इसके ठीक नीचे छिपी होती है एक और महान लाइन—”जैसा मिला, वैसा भेज दिया।” इस एक वाक्य को लिखते ही भेजने वाले की सारी नैतिक जिम्मेदारी वैसे ही खत्म हो जाती है, जैसे गंगा में डुबकी लगाने से पाप धुल जाते हैं। चाहे वह दावा इलायची चबाकर ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने का हो या फिर पांच का सिक्का घिसकर तांबा निकालने का।
काक-वाणी की कड़वी घुट्टी
काक-वाणी की कड़वी सच्चाई यही है कि ज्ञान बांटना पुण्य का काम है, लेकिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की इस ‘फर्जी ज्ञानगंगा’ में डुबकी लगाने से पहले अपने विवेक का फिल्टर जरूर लगाएं। अगली बार जब कोई संदेश ‘तुरंत शेयर करें’ के आदेश के साथ आए, तो अपनी उंगलियों को थोड़ा आराम दें। उसे फॉरवर्ड करने के बजाय डिलीट करें और देश की मानसिक शांति में अपना अमूल्य योगदान दें।