वाह! क्या दिव्य और भव्य सोच है। अब तक तो हम यही सोचते थे कि अयोध्या के राम मंदिर में केवल आध्यात्मिक शक्तियां ही सुरक्षा और व्यवस्था प्रदान करती हैं, लेकिन हमारी दूरदर्शी सरकार ने सोच लिया कि ‘हवाई सुरक्षा’ भी उतनी ही जरूरी है। अयोध्या मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के रूप में एक सेवानिवृत्त एयर मार्शल की नियुक्ति करके सरकार ने सिद्ध कर दिया है कि अब मोक्ष का मार्ग केवल भक्ति से नहीं, बल्कि ‘रणनीतिक हवाई सुरक्षा’ (Strategic Air Defense) से होकर गुजरेगा। इस अद्भुत खबर पर हमारे अति-बुद्धिजीवी मीडिया, विशेषकर ‘द वायर’, के पेट में जो मरोड़ उठी है, उसे देखकर काक-वाणी की चोंच से ठहाके रुक नहीं रहे हैं।
आसमान से सीधे गर्भगृह तक: एक नया ‘स्ट्रैटेजिक’ डिफेंस
सोचिए, अब मंदिर का प्रबंधन कितना अनुशासित और ‘मिल्ट्री-ग्रेड’ का होगा! अभी तक जो बेचारे पंडित जी भक्तों को “आगे बढ़िए, आगे बढ़िए” कहकर धकेलते थे, अब शायद वहां लाउडस्पीकर से कमांड सुनाई देगी—”सभी श्रद्धालु कॉम्बैट मोड ऑन करें, टार्गेट (भगवान की मूर्ति) पर ध्यान केंद्रित करें और तीन सेकंड के भीतर वहां से इजेक्ट हो जाएं!” वीआईपी दर्शन के लिए आने वाले नेताओं को अब शायद मंदिर में प्रवेश के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से ‘क्लीयरेंस’ लेनी होगी। और हां, यदि मंदिर परिसर में कोई जेबकतरा पकड़ा गया, तो उस पर सीधे ‘कोर्ट मार्शल’ की कार्रवाई की जा सकती है।
विरोधी दल चिल्ला रहे हैं कि यह सेना और धर्म का अजीब मिश्रण है। अरे भाई, जब तक आसमान में दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाले हमारे वीर रिटायर होने के बाद मंदिर के लड्डू और दान-दक्षिणा का हिसाब-किताब नहीं संभालेंगे, तब तक देश में ‘राम राज्य’ का अनुशासन कैसे आएगा? वैसे भी, पापियों के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने के लिए एयर मार्शल से बेहतर कमांडर भला और कौन हो सकता है?
‘द वायर’ की ‘धर्मनिरपेक्ष’ चिंता और काक-वाणी का नुस्खा
‘द वायर’ को इस बात की गहरी चिंता सता रही है कि भारत में सेना और राजनीति का यह कैसा कॉकटेल बन रहा है। वे शायद रातों को सो नहीं पा रहे होंगे कि कहीं कल को सुबह की आरती के समय शंख की जगह फाइटर जेट की गड़गड़ाहट न सुनाई देने लगे! लेकिन काक-वाणी उन्हें आश्वस्त करना चाहती है—घबराइए मत, यह तो सिर्फ एक बेहतरीन ‘रिटायरमेंट प्लानिंग’ का हिस्सा है। जब सरकारी विभागों और आयोगों में फिट होने वाले आईएएस बाबू कम पड़ने लगें, तो सेना के जांबाजों को इस तरह के ‘पवित्र मोर्चों’ पर तैनात करना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
चलो, कम से कम अब यह तो तय है कि अयोध्या के ऊपर से उड़ने वाले बादलों को भी बरसने से पहले मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ लेना होगा। कलयुग के इस दौर में भगवान को सुरक्षित रखने के लिए ‘एंटी-बैलिस्टिक’ आशीर्वाद की सख्त जरूरत थी। ‘जय हिंद’ और ‘जय सियाराम’ का यह अनूठा और रणनीतिक संगम वाकई इतिहास रच रहा है!
संदर्भ मुख्य समाचार: यहाँ देखें