अरे भाई! देश में मानसून भले ही समय पर न आए, लेकिन विपक्षी एकता का सुहाना मौसम अक्सर चुनाव आयोग की एक मामूली सी करवट से ही आ जाता है। खबर आई है कि हमारे प्यारे ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के तमाम सूरमाओं ने एक बार फिर अपने सारे गिले-शिकवे तिजोरी में बंद कर दिए हैं और एक-दूसरे को गले लगा लिया है। वजह? वही पुरानी और सदाबहार—चुनाव आयोग (ECI) का तथाकथित पक्षपातपूर्ण रवैया। वैसे तो ये दल आपस में सीटों के बंटवारे पर एक-दूसरे की पगड़ी उछालने का कोई मौका नहीं छोड़ते, लेकिन जैसे ही बात चुनाव आयोग को कोसने की आती है, इनका ‘फेविकोल का मजबूत जोड़’ चमकने लगता है।
विपक्षी एकता का असली टॉनिक: चुनाव आयोग की शिकायत
राजनीति के गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि ‘इंडिया’ गठबंधन अब चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर कोई बहुत बड़ी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने की तैयारी में है। सच कहें तो, चुनाव आयोग इन दलों के लिए किसी ‘इम्युनिटी बूस्टर’ से कम नहीं है। जब भी गठबंधन में सुस्ती छाने लगती है या आपसी कलह से मीडिया बोर होने लगता है, तो कोई न कोई समझदार नेता चिल्ला उठता है— “चलो, चुनाव आयोग को घेरते हैं!” और बस, पल भर में जो नेता कल तक एक-दूसरे का मुंह नहीं देखना चाहते थे, वे एक ही सुर में लोकतंत्र बचाने का राग अलापने लगते हैं।
काक-वाणी के गुप्त सूत्रों का कहना है कि इस बार की रणनीति बेहद ‘खतरनाक’ है। गठबंधन के नेता अब सिर्फ साधारण ज्ञापन नहीं सौंपेंगे, बल्कि इस बार उन्होंने बेहद कड़े शब्दों वाले ईमेल और शायद कुछ ट्वीट (अब एक्स) करने का फैसला किया है! जी हां, आपने सही सुना। जब देश का लोकतंत्र खतरे में हो, तो इससे बड़ा और क्या कानूनी कदम हो सकता है?
कानूनी दांव-पेच या सिर्फ एक और फोटो सेशन?
इस ‘महा-एकता’ का अगला चरण होगा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना, जहां से अक्सर इन्हें ‘अपनी याचिका वापस लीजिए या जुर्माना भरिए’ का प्रसाद मिलता है। लेकिन हार मानना तो इस गठबंधन के शब्दकोश में है ही नहीं। चुनाव में मिली हार का ठीकरा ईवीएम (EVM) या चुनाव आयोग के सिर मढ़कर ये नेता अपनी जिम्मेदारी से ऐसे मुक्त हो जाते हैं, जैसे कोई गंगा नहाकर आया हो। इनके लिए आयोग एक ऐसा विलेन है, जो इन्हें चुनाव हारने का एक बेहद सम्मानजनक बहाना मुफ्त में मुहैया कराता है।
खैर, राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ‘इंडिया’ गठबंधन की यह ‘अद्भुत एकता’ अगले तीन दिनों तक (या फिर अगले राज्य के विधानसभा चुनावों में सीट-बंटवारे की बैठक होने तक, जो भी पहले हो) जरूर टिकी रहेगी। तब तक के लिए, आइए इस क्षणभंगुर एकता का आनंद लें और चुनाव आयोग को धन्यवाद दें, जिसने कम से कम कुछ पलों के लिए ही सही, इन रूठे हुए दिलदारों को एक मंच पर लाकर खड़ा तो कर दिया!
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