जहर की घूंट और सियासत के घूंट: पंजाब के नेताओं का नया ‘एनर्जी ड्रिंक’

वाह रे हमारी भारतीय राजनीति! यहाँ मौत भी एक तमाशा है और खुदकुशी भी एक सुनहरा चुनावी अवसर। पंजाब में एक मजबूर शख्स ने जहर क्या खाया, मानों नेताओं के सूखे पड़े बयानों के बागों में बहार आ गई। अब आम इंसान तो यही सोचेगा कि अस्पताल में उस गरीब की जान बचाई जाए, उसके परिवार की सुध ली जाए। लेकिन ठहरिए! हमारे आदरणीय राजनेता इतने ‘सस्ते’ तरीके से किसी मानवीय त्रासदी को बिना किसी सियासी मुनाफे के व्यर्थ कैसे जाने दे सकते हैं? बिल्कुल नहीं। पंजाब के माननीय मंत्री जी ने तुरंत मोर्चा संभाला और विपक्ष पर ‘गंदी राजनीति’ करने का संगीन आरोप मढ़ दिया।

विपक्ष का ‘जहरीला’ प्रोपेगैंडा और सरकार का ‘पवित्र’ गुस्सा

मंत्री जी का कहना है कि विपक्ष इस दुखद घटना पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहा है। अब भला कोई मंत्री जी से पूछे कि हुजूर, रोटियां तो दोनों तरफ से ही सेकी जा रही हैं, बस तवा किसका ज्यादा गर्म है, असली लड़ाई तो इस बात की है। जब जनता तंग आकर कोई आत्मघाती कदम उठाती है, तो विपक्ष को उसमें अपनी ‘लॉन्चिंग’ का मसाला नजर आता है और सत्तापक्ष को उसमें विपक्ष की ‘साजिश’ दिखाई देती है। मंत्री जी को इस बात का दुख कम है कि राज्य में किसी नागरिक को जहर खाने की नौबत क्यों आई, बल्कि उन्हें मलाल इस बात का ज्यादा है कि विपक्ष इस ‘जहर’ का माइलेज अकेले कैसे ले रहा है!

‘गंदी राजनीति’ का असली पेटेंट आखिर किसके पास है?

राजनीति का एक शाश्वत नियम है- जब आप विपक्ष में हों, तो सड़क पर पड़ा पत्थर भी सरकार की नाकामी है। और जब आप सत्ता में आ जाएं, तो पूरा पहाड़ खिसक जाने पर भी वह ‘प्राकृतिक आपदा’ या ‘विपक्षी साजिश’ होती है। पंजाब की इस घटना में भी यही फार्मूला फिट बैठता है। मंत्री जी का यह बयान कि “विपक्ष गंदी राजनीति कर रहा है”, खुद में इतना साफ-सुथरा राजनीतिक स्टंट है कि इसके लिए उन्हें ऑस्कर मिलना चाहिए।

काक-वाणी की पैनी नजर से देखें तो इस पूरे ड्रामे में उस पीड़ित इंसान की हैसियत सिर्फ एक ‘प्रॉप’ यानी नाटक के सामान जैसी रह गई है। उसका दर्द, उसकी बेबसी तो प्रेस कॉन्फ्रेंस के शोर में कहीं दब गई है। कल को कोई नया मुद्दा आएगा, टीवी चैनलों पर नए प्रवक्ता चीखेंगे और यह जहर भी हवा हो जाएगा। तब तक के लिए, हमारे नेताओं की सेहत के लिए यह राजनीतिक जहर किसी टॉनिक से कम नहीं है। जनता घूंट-घूंट पीती रहे, और नेता अपनी सियासत चमकाते रहें!


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कागा जी