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जीत का अभाव – एक कहानी एक गांव में रहने

जीत का अभाव – एक कहानी

एक गांव में रहने वाला एक युवक था जिसका नाम राज था। राज बड़ा जिद्दी था और उसे हमेशा अपने मकसद की प्राप्ति के लिए लड़ना पसंद था। उसका सपना था कि वह किसी खेल में विजयी हो जाए और पूरे गांव में अपनी पहचान बना ले। इसलिए, राज हमेशा खेलों में हिस्सा लेता था और लड़ता रहता था। लेकिन ध्यान नहीं देने से वह हमेशा हार जाता था।

एक दिन, राज ने वहां खेले जाने वाले विभिन्न खेलों में जुड़ने के बारे में सूचना ली। उसे एक फुटबॉल मैच में हिस्सा लेने की संभावना मिली जिसमें उसकी सक्षमता के समान खिलाड़ी होंगे। राज ने सोचा कि यह एक अच्छा मौका है अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए और खेल में विजय हासिल करने के लिए। वह खेल की तैयारी करने लगा और अपनी सभी समय खेल में लगाई शुरू की।

खेल के दिन, सभी खिलाड़ियों ने अपने अच्छे खास्ते दिखाए थे। राज भी था। खेल शुरू होते ही राज अपनी सक्षमताओं का प्रदर्शन करने लगा। उसने गेंद को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे किसी भी दिशा में मारने की कोशिश की। लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। गेंद लगातार फिसलती रही और राज हारता चला गया। बाद में उसने देखा कि एक थोड़ी भी समझदार खिलाड़ी, जिसे कि नहीं लगता था कि वह गेंद को अच्छी तरह से हवा में मार सकता है, खेल में जीत दर्शाने में सफल हो गया था।

राज के मन में एक सवाल उठ उठा, कि क्यों उस खिलाड़ी को जीत मिल गयी जो उसकी सक्षमता से कम था? राज ने उस खिलाड़ी से बात की और उससे उसका राज जानने का प्रयत्न किया। बातचीत के समय में राज ने जाना कि वह खिलाड़ी न तो स्कूल जाता था और न ही कभी कोई कोच उसे ट्रेनिंग देता था। वह खेल खेलते खुद को ही सीखता था और हो सके तो जब भी कोई मौका मिला तो दूसरों से उसका अभ्यास लेता था। यह बात सुनकर राज ने समझा कि एक भले ही खिलाड़ी को उतनी ही जानकारी कोपीराइट किसी दूसरे खिलाड़ी को हो सकती है, जो अपनी मेहनत और लगन से खेलता है।

राज को इस बात से बड़ी सीख मिली कि आप जीत के लिए अपनी सक्षमता के अलावा अपनी मेहनत और लगन की भावना को ध्यान में रखना होगा। वह अपने कला को अधिक संगठित करने तथा मेहनत और लगन से काम करने के लिए प्रभावित हो गया। उसके भावनात्मक स्तर में भी एक बदलाव आया था। वह जीत की आकांक्षा की बजाय सही संदर्भ में खेलने की फिलोसोफी का उदाहरण भी बन गया था।

राज की सोच काबलिहत से ऊपर उठ गई थी और वह खेलों में खुद को बेहतर बनाने का काम करता रहा। वह उन समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करता था जिनके कारण उसने पहले हमेशा हारते हुए देखा था। वह अपनी समझ को बढ़ाता था, जो उसे किसी भी खेल में सफल होने के लिए बहुत जरूरी होती है।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और राज ने अपनी सभी खवाहिशों को पूरा कर लिया था। वह बेहतर कला और समझ के साथ एक बेहतर खिलाड़ी बन गया था और अपनी मेहनत के बल पर कुछ न कुछ जीतता रहता था। आखिरकार उसे उसकी समझदारी और मेहनत का फल मिलता ही उसे मिला था।

इस कहानी में समझ आता है कि जीत के लिए एक व्यक्ति को अपनी सक्षमता के साथ अपनी मेहनत का भी खयाल रखना चाहिए। वह अपनी सक्षमता को और बेहतर बनाने और अपने व्यक्तिगत विकास को ध्यान में रखता रहेगा। मेहनत करना जीत की कुंजी है।

कागा जी

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