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जीवन का एक संघर्ष एक दिन जब रोहन गुप्ता चार साल

जीवन का एक संघर्ष

एक दिन जब रोहन गुप्ता चार साल का था, उसके पिता ने जिज्ञासु बेटे से पूछा, “बेटा, तुम यहां अच्छा समय क्यों नहीं बिता सकते? जबकि तुम्हारे समक्ष एक बड़ी खेलने के लिए नहीं है?” रोहन उत्साह और खुशी से भर गया था और उसने एक गुदगुदाती हँसी लिए बोला, “हाँ, पापा, मैं जानता हूँ!” उसके बाद से वह हमेशा खेलने में लगा रहा। समय बीतता गया और वह सोचता रहा कि उसने कितने कुछ सीखा, लेकिन एक दिन वह सब कुछ खो देगा।

उस दिन रोहन अपने नन्हें हाथों से खेल रहा था, जब अचानक कुछ टूटा और उसके दाँत काट गए। वह पीड़ा से रोने लगा और उसकी माँ उसे अस्पताल ले गई। डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन लगाया और आराम करने के लिए कहा। रोहन में अब डर था कि उसे डॉक्टर की देखभाल बिना रखा जाएगा और वह मर जाएगा।

एक हफ्ते बाद, रोहन ने दूसरा घाव भी प्राप्त किया। जब उसे बारहवीं कक्षा में भेजा गया, वह नपुंसक बन गया था और उसे गुंडों से बुरा बुलाया जाता था। यह दुखी अनुभव रोहन को महसूस होता था कि उसके साथ अन्य बच्चों द्वारा हिंसा की जा रही है और वह बहुत अकेला है। फिर एक दिन उसे खुशी मिली क्योंकि एक नई लड़की ने उसे अपना दोस्त बनाया।

परेशानियां फिर से शुरू हो गईं जब रोहन के पिता का एक निर्धारित नौकरी से निकाल दिया गया था और उन्हें अब तक कोई नया काम नहीं मिला था। घर में धन कम था और उन्हें घर के किराये तक नहीं दिए जा रहे थे। रोहन ने खुशी से खुशी का अमेज़ॉन बक्सा खोला था, लेकिन उसे नहीं पता था कि उसे अमेज़ॉन से पैसे से माल बेचने के लिए धंधा करना होगा। रोहन के पिता ने उसे समझाया कि यह ठीक नहीं होगा, लेकिन उससे कुछ होने वाला नहीं था।

इस तरह कई संकटों के दौर से रोहन गुजरा। फिर एक दिन उसे एक बुढ़िया से मिला। उसने बुढ़िया से पूछा, “दादीजी, जीवन में संघर्ष कि ये कल्पना क्या है?” बुढ़िया ने उसे कुछ वाक्य बताये जिससे उसे अपने जीवन के संघर्षों का सामना करने की शक्ति मिली।

बुढ़िया ने कहा, “बेटा, जीवन में संघर्ष हमेशा रहता है। जब आप कुछ नहीं पाते हैं, जब आप कुछ नहीं होते हैं, जब आप गलत व्यक्तियों से आक्रमण के सामने खड़े होते हैं, जब आप कुछ सीखते हैं। संघर्ष बिना किसी उचित फल के भी होता है।”

बुढ़िया के इस वक्तव्य के बाद, रोहन को स्पष्ट था कि जीवन एक बड़ा संघर्ष है जिससे उसे लड़ना पड़ेगा। यह सत्य उसे बुरा लगता था, लेकिन यह वह स्वीकारना चाहता था। उसने बुढ़िया को धन्यवाद दिया और घर लौटने के लिए निकल गया। उस समय से रोहन ने जीवन के संघर्षों से लड़ना शुरू कर दिया।

स्थितियों में कभी कभी उसका हालात मजबूत नहीं होता था, लेकिन वह नहीं हारता था। दिन दृश्य नाटक में भाग लेना, स्कूल में उन बुरे बच्चों से लड़ना और पीड़ा से बचना। फिर एक दिन एक बिजली गिर गई जिससे उसे एक झड़ लग गयी। वह तुरंत अस्पताल ले जाया गया था और उसको दो महीने तक होश में नहीं था।

इस दौरान उसके पिता ने घर छोड़ दिया था क्योंकि वह परिवार को समझ नहीं पा रहे थे। रोहन के विशाल शस्त्र उसके साथ थे, लेकिन उसको अपनी ज़िम्मेदारी संभालनी पड़ी थी। इस वक्त, उसने यह सीखा कि अगर एक व्यक्ति आत्म विश्वास का विकास करता है, तो वह कभी हार नहीं सकता।

कुछ महीनों बाद, उसकी सेहत ठीक हुई थी और वह अपने आप को एक नए शुरुआत के साथ फिर से रखने के लिए सक्षम था। उसकी माँ उसे एक नई शुरुआत देने के लिए उसके गुरु के पास जा गई। इस वक्त, उसने यह भी सीखा कि जीवन में संघर्षों से लड़ना सबके लिए एक सामान्य अनुभव है। लेकिन जो लोग इससे संघर्ष नहीं करते हैं, उनके पास कभी भी सम्भवतः कोई मौका नहीं होता।

रोहन ने इस अनुभव से बहुत कुछ सीखा था। उसने सभी जीवन के संघर्षों का सामना करना सीखा, जो उसे मजबूत बनाता था। उसने यह भी सोचा कि वह भविष्य में एक उच्च शिक्षा प्राप्त करेगा, अपने सपनों को पूरा करेगा और एक सफल व्यक्ति बनेगा।

जीवन का संघर्ष एक चीज है जो हमेशा होती है। हमें जीवन के साथ सामना करना होगा, चाहे वह बुरा हो या अच्छा। लेकिन अगर हम इससे अखंड दृष्टिकोण से नहीं लड़ते हैं, तो हम कभी भी सफल नहीं हो सकते। रोहन ने इस सबको सीख लिया था और उसने इसे अपने जीवन में उतारा था।

कागा जी

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