‘टाइम’ का टाइमपास: गोरे साहब की चिंता और ‘विश्वगुरु’ की क्षमता

नमस्कार भारतवासियों! ‘काक-वाणी’ के इस नए अंक में आपका स्वागत है। खबर आई है कि सुदूर अमेरिका में बैठी ज्ञान की देवी ‘टाइम मैगजीन’ को रात में नींद नहीं आ रही है। उनका ताजा फरमान है कि जब तक भारत अपनी ‘स्टेट कैपेसिटी’ यानी सरकारी क्षमता नहीं बढ़ाएगा, तब तक उसका महाशक्ति बनना असंभव है। वाह! क्या अद्भुत खोज है! मानो हमारे बाबू लोग वर्षों से दफ्तरों में चाय-समोसा खाकर देश को मंगल ग्रह पर भेजने की तैयारी ही तो कर रहे थे, और इन गोरे साहबों ने आकर पोल खोल दी!

गोरे साहब की चिंता और भारतीय जुगाड़

टाइम मैगजीन वाले सीधे-साधे लोग हैं। वे कागज पर लिखे आंकड़े देखकर डर जाते हैं। उन्हें क्या पता कि भारत ‘सिस्टम’ से नहीं, ‘जुगाड़’ और ‘साहब की कृपा’ से चलता है। वे कहते हैं कि हमारी संस्थाएं कमजोर हैं, पुलिस बल कम है और न्याय प्रणाली धीमी है। अब कोई इन विदेशियों को समझाए कि हमारे यहां नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में ‘विश्वगुरु’ का बिगुल बज रहा है, और ये पत्रकार ‘क्षमता’ का रोना रो रहे हैं। अरे साहब, जिस देश में सड़क का एक गड्ढा भरने के लिए पांच मंत्रालयों की अनुमति लगती हो, उसकी ‘कैपेसिटी’ पर सवाल उठाना हमारी महान नौकरशाही का अपमान है!

सरकारी क्षमता का असली भारतीय मतलब

पश्चिमी पंडितों के लिए ‘स्टेट कैपेसिटी’ का मतलब टैक्स वसूली, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कानून व्यवस्था हो सकता है। लेकिन भारतीय राजनीति में इसका मतलब बिल्कुल अलग है। हमारे यहां क्षमता का मतलब है—एक फाइल को बीस साल तक अटकाने की क्षमता, चुनाव आते ही जनता को मुफ्त की रेवड़ियों से रिझाने की क्षमता, और हर प्रशासनिक विफलता का ठीकरा ‘नेहरू’ या ‘विदेशी साजिश’ पर फोड़ने की असीम क्षमता। जब हमारे पास इतनी दिव्य शक्तियां मौजूद हैं, तो हमें न्यूयॉर्क से छपने वाली मैगजीन के ज्ञान की क्या जरूरत?

टाइम का ज्ञान और ‘काक-वाणी’ का सच

सच तो यह है कि जब भी भारत अपनी चाल में थोड़ा सा आगे बढ़ता है, तो कोई न कोई पश्चिमी थिंक-टैंक या मैगजीन अपना ज्ञान बांटने आ जाती है। उन्हें लगता है कि उनके एक लेख से लुटियंस दिल्ली में हड़कंप मच जाएगा। पर वे भूल जाते हैं कि हमारे देश में ऐसी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का सबसे बेहतरीन इस्तेमाल रविवार को चाट-समोसे की प्लेट बनाने के लिए किया जाता है।

अंत में, ‘काक-वाणी’ यही सलाह देगी कि टाइम मैगजीन वालों, अपनी फिक्र करो। भारत का क्या है, वह अपनी ‘कमजोर क्षमता’ के साथ भी दुनिया को चौंकाता रहेगा, क्योंकि यहां सरकारें चाहें जिसकी आएं, हमारे बाबू, उनका लालफीताशाही का फीता और चाय का कुल्हड़ हमेशा अमर रहेंगे!


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कागा जी