तेजस्वी सूर्या का दिव्य ज्ञान: ‘जेन-जेड’ को राष्ट्रवाद और स्टार्टअप की मीठी घुट्टी

वाह! क्या बात है। जब देश के सबसे ‘ऊर्जावान’ और ‘तेजस्वी’ युवा सांसद टीवी स्क्रीन पर अवतरित होते हैं, तो समझ लीजिए कि देश की तमाम समस्याओं का समाधान बस दो मिनट की रील में सिमटने वाला है। ‘काक-वाणी’ के इस विशेष बुलेटिन में आज हम चर्चा कर रहे हैं तेजस्वी सूर्या जी के उस दिव्य साक्षात्कार की, जो उन्होंने हाल ही में ‘जेन-जेड’ (Gen-Z) और भारत के भविष्य पर दिया है।

जेन-जेड और राष्ट्रवाद का ‘कूल’ फ्यूजन

तेजस्वी जी ने यह साबित कर दिया है कि आज का युवा केवल रील्स बनाने, मीम्स शेयर करने या कैपुचीनो पीने के लिए पैदा नहीं हुआ है। उसका असली मकसद ‘न्यू इंडिया’ के नैरेटिव को आगे बढ़ाना है। तेजस्वी जी की दूरदर्शी नजरों में जेन-जेड का मतलब ‘लोनलीनेस’ या ‘करियर एंग्जायटी’ नहीं, बल्कि ‘नेशनलिज्म’ का नया और कूल वर्जन है। अब जो युवा नौकरी न मिलने से परेशान घूम रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि वे बेरोजगार नहीं हैं, बल्कि वे तो ‘स्टार्टअप इंडिया’ के भावी क्रांतिकारी हैं जो अभी बस ‘ब्रेनस्टॉर्मिंग’ फेज में हैं।

स्टार्टअप की घुट्टी और बेरोजगारी का अंत

साक्षात्कार में जिस तरह से उन्होंने युवाओं को स्टार्टअप का मंत्र दिया, उसे सुनकर दिल बाग-बाग हो गया। तेजस्वी जी का गणित बेहद सरल और सटीक है—अगर आपके पास नौकरी नहीं है, तो रोना क्यों? एक चाय की टपरी खोलिए, उस पर ‘एआई-पावर्ड’ का लेबल लगाइए, और बन जाइए आत्मनिर्भर! सरकार आपको मुद्रा लोन की उम्मीद देगी, और आप देश की जीडीपी चमकाएंगे। आखिर सिलिकॉन वैली को टक्कर बेंगलुरु के इसी जादुई मॉडल से ही तो मिलेगी।

युवाओं को राजनीति में आने की सलाह देते हुए उन्होंने जिस खूबसूरती से जमीनी मुद्दों को दरकिनार किया, वह काबिल-ए-तारीफ है। आज की युवा राजनीति का मतलब जनसंघर्ष या महंगाई पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग हैशटैग चलाना और एसी स्टूडियो में बैठकर देश के भविष्य पर गंभीर चिंता जताना है।

भविष्य इतना उज्ज्वल है कि काला चश्मा लगाना पड़ेगा

अंत में, ‘काक-वाणी’ तेजस्वी जी के इस उज्ज्वल विजन को नमन करती है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि भारत का भविष्य बहुत सुरक्षित हाथों में है—कम से कम भाषणों, पीपीटी प्रेजेंटेशन और टीवी डिबेट्स में तो निश्चित रूप से। अब देश के युवाओं को रोजगार और शिक्षा की चिंता छोड़कर सिर्फ देश के सुनहरे भविष्य की कल्पना करनी चाहिए। आखिर जब खुद तेजस्वी जी हमारे लिए इतनी चिंता कर रहे हैं, तो हमारा खुद सोचना तो वैसे भी समय की बर्बादी ही है!


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कागा जी