परम ज्ञानी और त्रिकालदर्शी वेब पोर्टल ‘द वायर’ ने एक बार फिर अपनी पत्रकारिता की दिव्य दूरबीन से इतिहास और भविष्य को एक साथ नाप लिया है। उनके नए और क्रांतिकारी ‘शोध’ के अनुसार, यदि देश में नरेन्द्र मोदी का शासन न होता, तो आज भारत इतना अमीर होता कि लोग अपनी जेब में चिल्लर की जगह सीधे कोहिनूर हीरा लेकर घूम रहे होते। इस रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि आज हम जितने ‘गरीब’ और ‘परतंत्र’ हैं, उसके एकमात्र जिम्मेदार वही हैं, जिन्होंने देशवासियों को विकास के सपने दिखाए थे।
काल्पनिक भारत का स्वर्ग और ‘द वायर’ की कल्पना
इस अद्भुत शोध को पढ़ने के बाद हमारी आंखें पूरी तरह से खुल गई हैं। अगर मोदी न होते, तो आज भारत में गरीबी नाम का शब्द केवल इतिहास की किताबों में मिलता। हर भारतीय नागरिक के पास अपनी निजी उड़ने वाली कार होती और स्वतंत्रता का स्तर यह होता कि लोग बिना किसी पासपोर्ट के सीधे अमेरिका चले जाते। इस काल्पनिक भारत में, जो केवल ‘द वायर’ के वातानुकूलित दफ्तरों में ही सांस लेता है, बेरोजगारी की दर शून्य से भी नीचे चली गई होती और लोग नौकरी न मिलने के दुख में नहीं, बल्कि ‘कौन सी नौकरी चुनें’ के कन्फ्यूजन में रो रहे होते।
‘अगर-मगर’ के विज्ञान से उपजा महान अर्थशास्त्र
इस शोध की वैज्ञानिक पद्धति की जितनी तारीफ की जाए, उतनी कम है। यह अर्थशास्त्र और ज्योतिष का ऐसा अनूठा संगम है, जिसमें ‘अगर मेरी चाची को पहिए होते, तो वह साइकिल होती’ वाले शाश्वत सिद्धांत पर काम किया गया है। ‘द वायर’ के बुद्धिजीवियों ने एक ऐसी वर्चुअल टाइम मशीन का आविष्कार किया है, जो केवल मोदी-विरोध के ईंधन से चलती है। इस मशीन में बैठकर वे एक ऐसे समानांतर ब्रह्मांड में गए, जहाँ पिछले दस साल से कोई और ही दिव्य शक्ति राज कर रही थी। वहाँ उन्होंने देखा कि लोग आज़ादी की इतनी शुद्ध हवा में सांस ले रहे हैं कि उन्हें फेफड़ों की कोई बीमारी ही नहीं हो रही और रुपया डॉलर को लात मारकर आगे निकल चुका है।
काक-वाणी का अंतिम कटाक्ष
हम ‘काक-वाणी’ के मंच से इस महान और काल्पनिक खोज के लिए लेखकों को ‘नोबेल कल्पनाशीलता पुरस्कार’ देने की पुरजोर वकालत करते हैं। आखिर असली आज़ादी और अमीरी तो वही है, जहाँ आपको किसी तथ्य, आंकड़े या जमीनी हकीकत की जरूरत न पड़े और आप केवल ‘शायद’, ‘यदि’ और ‘ऐसा होता तो वैसा होता’ के दम पर देश का भविष्य लिख सकें। धन्य है यह पत्रकारिता, जो हमें हकीकत की धूप से बचाकर, मुंगेरीलाल के हसीन सपनों की ठंडी छांव में ले जाती है!
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