जब भी हम भारतीय सिनेमा की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान बॉलीवुड की चकाचौंध पर ही जाकर टिक जाता है। लेकिन इस बार, देश के एक ऐसे कोने से सिनेमा की गूंज सुनाई दी है, जिसने सात समंदर पार टोरंटो में तहलका मचा दिया है। हम बात कर रहे हैं नागालैंड की बेहद खास और दिल को छू लेने वाली शॉर्ट फिल्म Angh की। युवा निर्देशक थेजा रियो (Theja Rio) की इस मास्टरपीस फिल्म ने टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में अपनी चमक बिखेरी है, जिसे लेकर अब बीबीसी (BBC) ने भी कसीदे पढ़े हैं।
नागालैंड की मिट्टी से टोरंटो के रेड कार्पेट तक
फिल्म Angh की कहानी केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि नागालैंड के इतिहास के पन्नों में दफन एक अनकहा सच है। साल 1963 के दौर में सेट की गई यह फिल्म एक ऐसे पूर्व मुखिया और उसके बेटे की कहानी दिखाती है, जो अपनी पुरानी संस्कृति और परंपराओं को बचाने की आखिरी कोशिश कर रहे हैं, जबकि उनके आसपास की दुनिया तेजी से ईसाई धर्म और आधुनिकता की ओर बढ़ रही है। थेजा रियो ने इस फिल्म को बेहद संवेदनशीलता और खूबसूरती के साथ बड़े परदे पर उतारा है।
कोडक सुपर 16mm पर शूट हुई यह जादुई फिल्म
सिनेमा प्रेमियों के लिए यह जानना बेहद रोमांचक होगा कि Angh को डिजिटल कैमरों पर नहीं, बल्कि पारंपरिक ‘कोडक सुपर 16mm’ फिल्म पर शूट किया गया है। यही वजह है कि फिल्म का हर एक फ्रेम दर्शकों को साठ के दशक के नागालैंड के देहाती और सुदूर इलाकों में ले जाता है। फिल्म के दृश्य इतने जीवंत हैं कि वे सीधे दर्शकों के दिलों को छूते हैं। टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में जब यह फिल्म दिखाई गई, तो वहां मौजूद वैश्विक दर्शक नागालैंड की इस खूबसूरत मगर दर्दभरी दुनिया को देखकर दंग रह गए।
क्षेत्रीय सिनेमा का नया सवेरा
‘काक-वाणी’ के पाठकों के लिए यह गर्व की बात है कि भारतीय सिनेमा अब सिर्फ मुख्यधारा की हिंदी या दक्षिण भारतीय फिल्मों तक सीमित नहीं रह गया है। पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर नागालैंड से इस तरह की अनूठी कहानियों का वैश्विक मंच पर आना एक नए युग की शुरुआत है। बीबीसी ने भी अपनी रिपोर्ट में माना है कि Angh जैसी फिल्में भारतीय सिनेमा की असली विविधता को दुनिया के सामने पेश कर रही हैं। थेजा रियो की यह कोशिश आने वाले समय में पूर्वोत्तर के कई अन्य फिल्मकारों के लिए नए दरवाजे खोलेगी।
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