फिल्म इंस्टीट्यूट जिसने बदला बॉलीवुड का ‘डीएनए’: एफटीआयआय की यह कहानी नहीं सुनी तो क्या सुना!

अगर आपसे कहा जाए कि आज जो चकाचौंध से भरा बॉलीवुड आप देख रहे हैं, उसका असली ‘डीएनए’ पुणे के एक शांत कैंपस में तैयार हुआ था, तो क्या आप यकीन करेंगे? जी हां, बात हो रही है Film and Television Institute of India (FTII) की! अगर एफटीआयआय नहीं होता, तो शायद हमें वह सिनेमा कभी न मिलता जिसने दुनिया भर में भारत का परचम लहराया है। ‘काक-वाणी’ के इस खास कॉलम में जानिए कैसे इस ऐतिहासिक संस्थान ने हमारे सिनेमा की नस-नस में बेमिसाल टैलेंट का रस घोला है।

एफटीआयआय: जहां से निकले एक्टिंग के ‘रॉकस्टार्स’

एक दौर था जब बॉलीवुड में सिर्फ बड़े घराने या गॉडफादर वाले लोग ही राज करते थे। लेकिन एफटीआयआय ने इस ढर्रे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस संस्थान ने इंडस्ट्री को ऐसे नायाब हीरे दिए जिन्होंने एक्टिंग के पुराने ढर्रे को बदलकर ‘नेचुरल एक्टिंग’ का दौर शुरू किया। नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी, शबाना आजमी और जया बच्चन जैसे दिग्गजों ने इसी कैंपस की मिट्टी में अपने अभिनय को निखारा था। फिर चाहे बात 80 के दशक में तहलका मचाने वाले डिस्को डांसर मिथुन चक्रवर्ती की हो, या फिर आज के दौर के वर्सटाइल एक्टर्स राजकुमार राव, विजय वर्मा और जयदीप अहलावत की, इन सभी टैलेंटेड स्टार्स की जड़ें पुणे के इसी प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़ी हैं।

कैमरे के पीछे के ‘मास्टरमाइंड’ और तकनीकी जादूगरी

सिनेमा सिर्फ पर्दे पर दिखने वाले एक्टर्स का खेल नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे काम करने वाले विजनरीज का कमाल होता है। एफटीआयआय ने भारतीय सिनेमा को सिर्फ चेहरे ही नहीं दिए, बल्कि ऐसे डायरेक्टर्स और तकनीशियन भी दिए जिन्होंने फिल्मों की भाषा बदल दी। अपनी भव्य फिल्मों के लिए मशहूर संजय लीला भंसाली हों या फिर 80 और 90 के दशक के ‘शोमैन’ सुभाष घई, सबने इसी जगह से सिनेमा का ककहरा सीखा है। इसके अलावा, साउंड की दुनिया में इतिहास रचने वाले ऑस्कर विजेता रसूल पुकुट्टी ने भी यहीं से साउंड डिजाइनिंग का हुनर सीखा और ऑस्कर तक का सफर तय किया।

संक्षेप में कहें तो, एफटीआयआय ने भारतीय सिनेमा को मेलोड्रामा के कुएं से निकालकर यथार्थवाद, तकनीक और कलात्मकता के खुले आसमान में पहुंचाया है। इसने सिनेमा के डीएनए में वो पैशन भरा है जो आज भी हमारी फिल्मों में झलकता है। तो दोस्तों, अगली बार जब आप थिएटर्स में किसी फिल्म के जबरदस्त शॉट पर तालियां बजाएं, तो समझ लीजिएगा कि उसके पीछे एफटीआयआय की ही सीख काम कर रही है!


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कागा जी