लोकतंत्र का ‘डिजिटल शुद्धिकरण’: जब वोटर ही गायब हो जाएं, तो चुनाव कितना आसान!

वाह! क्या बात है! विदेशी मीडिया ‘एनपीआर’ चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा है कि भारत में इतिहास का सबसे बड़ा ‘वोटर सफाया’ अभियान चल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, लाखों-करोड़ों लोग बिना किसी जादू-टोने के अचानक वोटर लिस्ट से गायब हो गए हैं। अब भला इसमें रोने-धोने वाली क्या बात है? इसे कहते हैं असली ‘डिजिटल इंडिया’! जब जनता से कागजात मांगो तो वे नखरे दिखाते हैं, इसलिए हमारे आदरणीय चुनाव आयोग ने भी सोच लिया—’ना रहेगा वोटर, ना बजेगी चुनाव की बांसुरी!’

लोकतंत्र की नई ‘वेट लॉस’ थेरेपी

दुनिया में लोग वजन घटाने के लिए फैंसी डाइट अपनाते हैं, लेकिन हमारे दूरदर्शी चुनाव आयोग ने लोकतंत्र को छरहरा बनाने के लिए ‘वोटर-फ्री डाइट’ ईजाद कर ली है। सोचिए, जब लिस्ट में वोटर ही कम होंगे, तो ईवीएम की जरूरत कम पड़ेगी, पोलिंग बूथ का खर्चा बचेगा और सबसे बड़ी बात—गर्मी में लंबी-लंबी लाइनों का झंझट खत्म! ‘काक-वाणी’ इस क्रांतिकारी सोच को झुककर प्रणाम करती है। आखिर ‘स्वच्छ भारत अभियान’ सिर्फ सड़कों तक ही क्यों सीमित रहे? वोटर लिस्ट की सफाई भी तो उतनी ही जरूरी है!

विपक्ष का पुराना रोना-धोना

अब जरा हमारे प्यारे विपक्ष की भी सुन लीजिए। जैसे ही एनपीआर की रिपोर्ट बाहर आई, वे ऐसे छाती पीटने लगे मानो किसी ने उनसे उनकी मनपसंद कुर्सी छीन ली हो। वे इसे ‘इतिहास का सबसे बड़ा मताधिकार हनन’ बता रहे हैं। अरे भाई! जरा पॉज़िटिव सोचिए। जिन लाखों लोगों के नाम काटे गए हैं, आयोग ने उन्हें रविवार के दिन धूप में लाइन में खड़े होने के भारी-भरकम राष्ट्रीय कर्तव्य से हमेशा के लिए ‘मुक्त’ कर दिया है। अब वे आराम से चुनाव वाले दिन घर पर पकौड़े तल सकते हैं। शुक्रिया अदा करने के बजाय आप आयोग पर इल्जाम लगा रहे हैं?

‘गायब वोटर’ और भावी चुनाव

आम जनता को भी अब समझ जाना चाहिए। अगली बार अगर आप वोट डालने जाएं और पोलिंग अफसर कह दे कि ‘आप तो वोटर लिस्ट में हैं ही नहीं’, तो बहस करके अपना बीपी मत बढ़ाइए। चुपचाप मान लीजिए कि सरकार की नजर में आप ‘डिजिटल मोक्ष’ प्राप्त कर चुके हैं। इस रफ्तार से काम चलता रहा, तो अगला चरण बेहद खूबसूरत होगा—लिस्ट में सिर्फ उम्मीदवारों के नाम होंगे, वे आपस में ही एक-दूसरे को वोट देंगे और शाम तक नतीजे आ जाएंगे। कितना पारदर्शी, शांतिपूर्ण और किफायती चुनाव होगा!

खैर, ‘काक-वाणी’ की सलाह यही है कि अगर आपका नाम अभी भी वोटर लिस्ट में दिख रहा है, तो इसे लोकतंत्र की ताकत मत समझिए… बस चुनाव आयोग की एक छोटी सी ‘भूल’ मानिए। अगली सूची आने तक का इंतजार कीजिए, क्या पता आपका भी इस झंझट से ‘उद्धार’ हो जाए!


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कागा जी