Title: बच्चों की खुशी
एक छोटे से गांव में रहने वाले बच्चे अपनी जिंदगी से बहुत खुश हुए जो किसी रंग भरे दरिया के किनारे सहीद की तरह बैठे थे। एक सामान्य दिन उन्होंने पास में दूध की खुराक परिभाषित की जिसे वे कहते थे कि यह दूध लेने के लिए अपना दूध बेचना पड़ता है। लेकिन उस दिन कुछ अलग था। उन्होंने देखा कि दूध बेचते समय वे बहुत से बच्चों को खेलते देखते हैं।
अब वे अपने दोस्तों को अपने साथ खेलने के लिए बुलाते हैं। उन्होंने अपने दोस्तों के साथ खेल का एक प्लान बनाया जिसमें उन्हें छिपकली कूदनी होगी और फिर वे एक रेस में होंगे। सभी उत्साह और खुशी से भरे हुए थे।
वे यह सोचते हुए कि क्योंकि उनके आस-पास सिर्फ खेल छेड़छाड़ के साथ भरा हुआ था, इसलिए वे एक तरह से अपनी सफलता का आनंद उठा रहे थे।
एक दिन इन बच्चों की एक स्कूल में कक्षा हुई जहां शिक्षक ने उन्हें खेलने से नहीं, शिक्षा से होने वाले लाभ के बारे में बताया। इससे उन्हें थोड़ा गुस्सा आया क्योंकि वे खेलने के लिए अधिक उत्साहित थे।
यह आदत लगभग दो महीने तक चली, जब तक एक दिन उनमें हुआ परिवर्तन न हो जिसे उन्होंने कभी नहीं सोचा था। बच्चों का एक समूह झुंडिले से गुज़रता हुआ, चंडीगढ़ से उनके गांव तक पहुँचा।
झुंडिले में कई लोग खुसरो के शैली के कपड़ों में बेहतरीन आरामदायक गाड़ियों पर बैठे थे। उन्हें देखकर बच्चों ने सोचा कि इतना अच्छा जीवन क्या होगा। इसलिए, उन्होंने सोचा कि वे भी मेहनत करें और अपना जीवन बनाएं।
उन दिनों से, उनकी आत्मा में सकारात्मकता भरी हुई थी। वे अब एक सफल इंसान बनने के लिए मेहनत कर रहे थे।
एक दिन उन्होंने फिर से अपने बचपन के दोस्तों के साथ खेलने का प्लान बनाया। वे एक स्थान पर एक साथ ये श्रमिकों के बच्चों का समूह देखते हैं और उन सभी के संग समय बिताने का आनंद उठाते हैं। वे यहां खेलते हुए बच्चों ने सही में उस समय का आनंद उठाया जो किसी मिले भविष्य की नहीं था।
उन दिनों, बच्चों की सारी समय खुशी से भर गयी थी क्योंकि उन्होंने सलाह दी थी कि वे अपने जीवन को अपने तरीके से जीवन दें। वे यह सोचते हुए अपनी नयी दुनियां में धीमी धुंधली तीली रोशनी को पाते हुए आगे बढ़े जा रहे थे।
इस तरह से, बच्चों ने अपने स्वर्णिम भविष्य का निर्माण किया जो किसी भी रूप से अनुभव नहीं हुआ था। यह फिर से साबित होता है कि अकेले हम कुछ नहीं कर सकते हैं और एक साथ हम हर मुश्किल का सामना कर सकते हैं।