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“बेटे का सपना” एक छोटे से गांव में रहता था एक

“बेटे का सपना”

एक छोटे से गांव में रहता था एक गरीब परिवार। जहाँ शहर से एक छोटी सी दुकान चलाते थे और उनके पास नौकरी नहीं थी। जो थोड़ा सा भी कमाते थे उस पैसे से घर चलाने की कोशिश करते थे।

पिता का नाम सुरेश था जो कि एक एकलौते बेटे रोहित के पिता थे। रोहित का सपना था कि वह अपने माँ-बाप के लिए एक घर खरीदे। शायद इसलिए उसी के मन में यह ख्याल आया था कि वह पढ़ाई में ध्यान दे और अच्छा सपने पूरे करने में सफल हो जाए। लेकिन बाबूलाल के पास इतना पैसा नहीं था कि वह रोहित की पढ़ाई की शुरुआत के लिए कुछ पैसे खर्च कर सके।

लेकिन रोहित निराश नहीं हुआ। उसने पता नहीं कैसे लेकिन कर लिया उसने अपना बेहद मुश्किल से जुटाया हुआ कुछ पैसा स्कूल जाने वाले अन्य बच्चों के ब्याज से।

रोहित ने पूरा ध्यान देकर पढ़ाई ही नहीं सात सालों में इस पैसे से मैंने कुछ घंटे दूरी पर सर्विस सेंटर खोल लिया जहाँ से में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे कि मोबाइल और कंप्यूटर रिपेयर करता था।

अपनी कठिन परेशानी में उसका सबसे अच्छा दोस्त उससे दूर जा चुका था लेकिन उसका सपना रोहित के लिए हमेशा ही उसके साथ रहता था। रोहित ने अपनी पहली कमाई से कुछ खुश खबर साझा की। उसका सपना था कि वह अपने माँ-बाप का एक घर खरीदे लेकिन वो रोहित की दिमागी क्षमता देखते हुए कर नहीं पाए। उन्होंने गुस्से में हाथ जड़ा दिल्ली चले गए और वहाँ सरकार की नौकरी पा ली।

स्कूल छोड़ने के बाद से लेकर उस दिन तक रोहित कहीं नहीं घूमा था। उसकी जिंदगी बस उसकी दुकान और पढ़ाई के बीच फंस गई थी। वो भी उस मामले में काफी कुछ सोच बैठा। अब वो उसी दुकान के साथ अधिक समय नहीं दे सकता था, कभी न कभी वो भी बड़ी नौकरी पा लेगा।

लेकिन इस बीच उनके दुकान में थोड़ा सा बदलाव हुआ था जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। उनके दुकान के उन्नतिशील धारक वो दुनिया में बड़े-बड़े धनवानों के कहने और बिना हिचकिचाए उनकी हर बात मान लेते हैं। इससे उन्हें समय की कमी होने लगी थीं और वे सोचने लगे कि उसका बेटा उनसे कहाँ खुश होगा?

फिर वे अपने दुकान का नाम अपने बेटे के नाम पर रख दिया। रोहित के पास इस न्यूनतम पूंजी के लिए ज्यादा खुशी नहीं थी पर उसके बाद से उसने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से वह दुकान पता करता और आता था। सफलता उसे अपने कमाए हुए पैसों के साथ कुछ सबूत दिखाने लगी थी। उसके पापा सक्षम हो गए थे कि उन्हें उनके प्रति भरोसा होना चाहिए।

अपने हौसले और संघर्ष से रोहित जल्दी ही अच्छे अंक प्राप्त करने लगा था। उस दिन के बाद से लेकर अब तक, उसने हमेशा अपने सपनों के लिए मेहनत की। सफलता नहीं, सफलता के रास्ते का बीच का यह सफर नहीं आसान रह गया था। लेकिन उसने हमेशा इंसान बने रहने का वादा किया था और नहीं टूटने दिया।

एक दिन उसका सपना साकार होता नजर आया जब उसकी कमाई इतनी बढ़ गई कि वह आसानी से अपने माँ-बाप के लिए एक नया घर खरीद सका। उस दिन के बाद उसके पापा बेहद गर्व से भर गए। वो जानते थे कि उनका बेटा किस तरह कड़ी मेहनत करते हुए इस मुकाम को हासिल करता गया।

उसका सपना साकार हो गया था। उसकी नाकामियों और संघर्षों के बीच उसका प्रयत्न सफल हो गया था। अब वो एक अच्छे जीवन की शुरुआत कर सकता था। उसके सफल होने से उसे और बड़ा सपना साकार करना है- उसे अपने पड़ोसी के गरीब बच्चों की मदद करना है ताकि वे भी उसी तरह के सपने देख सकें।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सपने पूरे करने के लिए विश्वास, मेहनत और प्रयत्न का साथ चाहिए होता है। जहाँ थोड़ी सी मेहनत और लगन से हम सब कुछ हासिल कर सकते हैं।

कागा जी

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