‘मदर इंडिया’ के हल से ‘कॉकटेल’ के ग्लास तक: क्या वाकई आज़ाद हुई बॉलीवुड की नारी?

बॉलीवुड और महिलाओं का रिश्ता बड़ा ही अनोखा रहा है। हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया की एक हेडलाइन ने एक बड़ा ही सुलगता हुआ सवाल उठाया है- ‘मदर इंडिया से कॉकटेल 2 तक: क्या वाकई भारतीय सिनेमा ने महिलाओं को खुद के फैसले लेने की आज़ादी (agency) दी है?’ अब इस गंभीर मुद्दे पर हमारी ‘काक-वाणी’ की पैनी नज़र न पड़े, ऐसा तो हो ही नहीं सकता! तो चलिए, आज इसी का कड़वा और मीठा सच खंगालते हैं कि आखिर पर्दे की नारी कितनी सच और कितनी शिकारी बनी है।

‘त्याग की देवी’ से ‘शॉट लगाने वाली वेरोनिका’ तक का सफर

एक जमाना था जब नरगिस फिल्म Mother India में गरीबी के दलदल में धंसी, कंधे पर हल खींचती हुई आंसुओं की नदियां बहाती थीं। वह समाज के लिए आदर्श थीं क्योंकि उन्होंने सब कुछ सह लिया और अपनी आज़ादी का बलिदान दे दिया। फिर आया ‘कॉकटेल’ का दौर, जहां दीपिका पादुकोण (वेरोनिका) टेबल पर चढ़कर बिंदास नाचती हैं, अपनी मर्जी से जीती हैं और अपनी शर्तों पर प्यार करती हैं। पहली नज़र में लगता है, ‘वाह! नारी सचमुच आज़ाद हो गई।’ लेकिन काक-वाणी के चश्मे से देखें तो यह सिर्फ़ आज़ादी का भ्रम है।

आज़ादी का ढोंग या सिर्फ नया फार्मूला?

अक्सर बॉलीवुड फिल्मों में ‘मॉडर्न वुमन’ को शराब पीते, सिगरेट फूंकते और छोटे कपड़े पहनते हुए दिखाया जाता है। क्या पुरुष प्रधान समाज की नकल करना ही असली आज़ादी है? फिल्म ‘कॉकटेल’ का ही उदाहरण लें। अंत में नायक को दिल लगाने और घर बसाने के लिए वही ‘घरेलू और संस्कारी’ लड़की ही चाहिए थी। वेरोनिका जैसी बिंदास लड़की को अंत में रोना और खुद को बदलना ही नसीब हुआ। यानी बॉलीवुड आज भी चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा है- ‘लड़की कितनी भी मॉडर्न हो जाए, आखिर में उसे संस्कारी सांचे में ही ढलना होगा!’

बदलाव की बयार या सिर्फ दिखावा?

ऐसा नहीं है कि सब कुछ पुराना ही है। ‘पिंक’, ‘थप्पड़’ और ‘राज़ी’ जैसी फिल्मों ने महिलाओं को अपनी किस्मत खुद लिखने की ताकत दी है। लेकिन जब बात करोड़ों कमाने वाली मसाला फिल्मों की आती है, तो आज भी हीरोइनें सिर्फ ‘ग्लैमर का तड़का’ लगाने और हीरो की बांहों में झूलने के लिए ही इस्तेमाल होती हैं। तो हुजूर, अगली बार जब आप पर्दे पर किसी मॉडर्न लड़की को आज़ादी की बातें करते देखें, तो सोचिएगा ज़रूर कि क्या उसे सचमुच आज़ादी मिली है, या उसे सिर्फ एक नए, चमकीले पिंजरे में कैद कर दिया गया है!


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कागा जी