सुबह की पहली किरण के साथ जब चाय की चुस्की ली जाती है, तो हमारे फोन की घंटी बजती है। यह घंटी किसी जरूरी काम की नहीं, बल्कि ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के सुबह-सुबह के ज्ञान की गंगा की होती है। इस पावन विश्वविद्यालय में रोज सुबह ऐसे-ऐसे क्रांतिकारी शोध होते हैं कि नासा और इसरो वाले भी अपनी डिग्रियां गंगा में बहाने की सोचने लगें। आइए, आज हम इस ज्ञान के समंदर से कुछ ऐसे मोती निकालते हैं, जिन्होंने हमारी बुद्धि का दही कर रखा है।
यूनेस्को का थका हुआ ‘सर्वश्रेष्ठ’ अवॉर्ड
हमारे व्हाट्सएप ग्रुप्स के अनुसार, यूनेस्को दुनिया की सबसे खाली संस्था है। इसका एकमात्र काम भारतीय राष्ट्रगान, भारतीय सिक्कों, या फिर किसी ऐतिहासिक मंदिर को ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करना है। हर दूसरे दिन एक नया मैसेज आता है, “बधाई हो! यूनेस्को ने हमारे ₹2000 के नोट को दुनिया का सबसे खूबसूरत नोट घोषित किया है।” बेचारे यूनेस्को के अधिकारियों को शायद खुद नहीं पता कि वे कब और किसे अवॉर्ड बांट रहे हैं। सच तो यह है कि यूनेस्को ऐसी कोई लिस्ट जारी नहीं करता, लेकिन हमारे फूफाजी और मौसाजी इस ज्ञान को पूरे खानदान में बांटे बिना चैन की सांस नहीं लेते।
नासा का ‘सॉफ्टवेयर’ और वेदों का कनेक्शन
व्हाट्सएप वैज्ञानिकों का दूसरा सबसे प्रिय खिलौना है ‘नासा’। दावा किया जाता है कि नासा के सुपर कंप्यूटर जब संस्कृत के श्लोक बोलते हैं, तो उनकी हैंगिंग प्रॉब्लम ठीक हो जाती है। इतना ही नहीं, नासा ने तो यह भी खोज निकाला है कि घर के बाहर फिटकरी बांधने से कोरोना और 5G का रेडिएशन बिल्कुल खत्म हो जाता है। जब असली नासा वाले ये दावे पढ़ते होंगे, तो वे अंतरिक्ष से सीधे जमीन पर कूदने की सोचते होंगे। विज्ञान बेचारा कोने में बैठकर रो रहा है और हमारे ग्रुप एडमिन साहब ‘हल्दी-दूध से कैंसर का इलाज’ पांच मिनट में खोजकर बैठे हैं।
जागिए और फॉरवर्ड का बटन छोड़िए
इस अद्भुत विश्वविद्यालय के पास हर बीमारी का इलाज है और हर रहस्य की चाबी है। लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि इन दावों में उतनी ही सच्चाई होती है जितनी नेताओं के चुनावी वादों में। अगली बार जब आपके पास ‘इसे 11 लोगों को भेजें, शाम तक खुशखबरी मिलेगी’ वाला मैसेज आए, तो कृपया अपनी उंगलियों को थोड़ा आराम दें। देश का भला इसी में है कि हम इस ‘फेक न्यूज फैक्टरी’ के चांसलर न बनें और कोई भी जानकारी आगे भेजने से पहले गूगल बाबा से उसकी सच्चाई जरूर पूछ लें।