नमस्कार, ‘काक-वाणी’ के विशेष स्तंभ ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। आज हम बात करेंगे उस ऐतिहासिक क्षण की, जिसने ज्ञान के क्षेत्र में ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड को भी घुटनों पर ला दिया है। जी हां, सोशल मीडिया पर उड़ती-उड़ती खबर आई है कि यूनेस्को (UNESCO) ने भारत के ‘व्हाट्सएप फॉरवर्ड’ को दुनिया का सबसे विश्वसनीय ज्ञान स्रोत घोषित कर दिया है। यदि आपने यह संदेश तुरंत 11 लोगों को फॉरवर्ड नहीं किया, तो आपकी फोन गैलरी में केवल ‘गुड मॉर्निंग’ के फूल ही बचेंगे!
यूनेस्को का नया ‘विश्वसनीयता’ पुरस्कार और हमारे फूफाजी
आखिरकार यूनेस्को को हमारे पारिवारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स के आगे झुकना ही पड़ा। हर साल हमारे फूफाजी और मौसाजी सुबह-सुबह लाल गुलाब के साथ ‘कैंसर का 100% अचूक इलाज’ भेजते हैं। नींबू को गर्म पानी में निचोड़कर पीने से कोरोना से लेकर कयामत तक का इलाज ढूंढने वाले इन महापुरुषों को अब तक नोबेल पुरस्कार न मिलना विज्ञान की सबसे बड़ी हार थी। लेकिन अब और नहीं! व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ‘कुलपति’ यानी हमारे परम पूजनीय ग्रुप एडमिन साहब ने घोषणा की है कि जल्द ही नासा (NASA) भी अपने सारे सैटेलाइट बंद करके तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाने के वैज्ञानिक फायदों पर रिसर्च शुरू करने जा रहा है।
जब नासा ने सुनी सूर्य से ‘ओम’ की आवाज
फैक्ट-चेक की इस पवित्र गंगा में जब हमने गोता लगाया, तो हमें पता चला कि नासा के वैज्ञानिक दिन-रात हेडफोन लगाकर अंतरिक्ष की आवाजें सुन रहे हैं। व्हाट्सएप के अनुसार, सूर्य से स्पष्ट रूप से ‘ओम’ की ध्वनि आ रही है। हालांकि, नासा की आधिकारिक वेबसाइट इस बारे में पूरी तरह चुप है, लेकिन हमें नासा के वैज्ञानिकों से ज्यादा भरोसा अपने मोहल्ले के शर्मा जी के उस फॉरवर्ड पर है, जिसमें उन्होंने लिखा है—’इसे अनदेखा न करें, वरना कुछ अनहोनी हो सकती है।’ आखिर नासा वालों ने मंगल ग्रह पर पानी ढूंढा होगा, लेकिन हमारे व्हाट्सएप ज्ञानियों ने तो चाय की केतली में ही पूरा ब्रह्मांड ढूंढ निकाला है।
व्हाट्सएप का कड़वा सच
अब आते हैं थोड़े कड़वे सच पर। असलियत यह है कि यूनेस्को के पास इतना फालतू समय नहीं है कि वह हर दूसरे दिन हमारे राष्ट्रगान, हमारे प्रधानमंत्रियों या हमारी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी को ‘बेस्ट’ घोषित करता फिरे। नींबू-पानी पीने से वजन भले ही थोड़ा कम हो जाए, लेकिन गंभीर बीमारियां ठीक नहीं होतीं। और हां, रात को सोते समय तकिए के नीचे हरी मिर्च रखने से नौकरी नहीं मिलती, उसके लिए पढ़ाई करनी पड़ती है।
लेकिन इस सच से हमारे फॉरवर्ड-वीरों का क्या लेना-देना? उनके लिए तो ‘परम सत्य’ वही है जो नीले रंग के ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ टैग के साथ आता है। इसलिए, अगली बार जब आपके पास ऐसा कोई ‘महा-ज्ञान’ आए, तो उसे शेयर करने से पहले अपने दिमाग का इस्तेमाल करें (भले ही वह व्हाट्सएप पर फ्री न मिला हो)। पढ़ते रहिए काक-वाणी, क्योंकि हम सच को सच और झूठ को महा-झूठ साबित करने का ठेका लिए बैठे हैं!