वाह! मान गए अल-जज़ीरा के खोजी पत्रकारों को। जब भारत में विपक्ष, ईवीएम, और महंगाई जैसे घिसे-पिटे मुद्दों से मोदी जी का बाल भी बांका नहीं कर पाया, तो कतर के इस महान ज्ञान-कूप ने भारतीय लोकतंत्र को बचाने के लिए एक नया ‘क्रांतिकारी योद्धा’ ढूंढ निकाला है—कॉकरोच! जी हां, वही जीव जो आपकी रसोई में आधी रात को बिना वीज़ा-पासपोर्ट के घूमता पाया जाता है और एक चप्पल की मार से शहीद हो जाता है।
अल-जज़ीरा का ‘कीट-शास्त्र’ और भारतीय लोकतंत्र
शीर्षक की गंभीरता तो देखिए— “क्या भारत का ‘कॉकरोच’ आंदोलन मोदी की भाजपा को अपनी राजनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगा?” इस अद्भुत विश्लेषण को पढ़कर ऐसा लगता है कि मानो अब संसद भवन में विपक्ष की कुर्सियों पर काले-लाल कॉकरोच बैठकर ‘तानाशाही’ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास कराने वाले हैं। अल-जज़ीरा के अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, ये कॉकरोच कोई साधारण कीड़े नहीं हैं, बल्कि यह दबे-कुचले लोगों की ‘मौन क्रांति’ का जीवंत प्रतीक हैं। वैसे, यह तुलना वैज्ञानिक रूप से सही भी है; कॉकरोच परमाणु हमले में भी जिंदा बच सकते हैं, शायद इसीलिए विदेशी बुद्धिजीवियों को लगता है कि मोदी लहर में विपक्षी वजूद को बचाने की क्षमता सिर्फ इन्हीं जीवों में बची है।
क्या अमित शाह लाएंगे ‘एंटी-कॉकरोच’ अध्यादेश?
इस सनसनीखेज रिपोर्ट के बाद भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय में कथित तौर पर भारी हड़कंप है। हमारे गुप्त सूत्रों (जो अक्सर चाय की टपरी पर मिलते हैं) के अनुसार, गृहमंत्री अमित शाह इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट पर नजर बनाए हुए हैं। पार्टी के भीतर इस बात पर गहन मंथन चल रहा है कि क्या ‘हिट’ (HIT) स्प्रे को ‘यूएपीए’ (UAPA) के दायरे में लाया जाए या फिर विपक्ष की रैलियों में कीटनाशक छिड़कने के लिए एक नया ‘राष्ट्रीय कीट नियंत्रण बल’ गठित किया जाए। आखिर राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है भाई! अगर ये कॉकरोच सचमुच भाजपा की राजनीति को ‘रीथिंक’ करने पर मजबूर कर रहे हैं, तो यह सीधे-सीधे आंतरिक सुरक्षा में घुसपैठ है।
काक-वाणी का मानना है कि विदेशी मीडिया की इस ‘कीट-क्रांति’ से भारत में और कुछ बदले न बदले, लेकिन ‘पेस्ट कंट्रोल’ कंपनियों के शेयर जरूर आसमान छूने वाले हैं। जब तक अल-जज़ीरा जैसे निष्पक्ष मसीहा हमारे लोकतंत्र की रक्षा के लिए भारत की नालियों और रसोइयों का मुआयना कर रहे हैं, तब तक मोदी सरकार को किसी विपक्ष से डरने की जरूरत नहीं है। भारत की जनता वोट डालने के लिए ईवीएम का बटन दबा रही है, और वहां सात समंदर पार बैठे पत्रकार कॉकरोच की चाल में भारत का भविष्य पढ़ रहे हैं। अद्भुत पत्रकारिता है, धन्य है यह ‘काक-दृष्टि’!
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