वाह! कूटनीति हो तो ऐसी हो, वरना न हो। हमारे माननीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर साहब ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब देश के भीतर के मुद्दे बोरिंग होने लगें, तो सुदूर यूरोप के नक्शे से चार ऐसे देश ढूंढ निकालिए जिनका नाम औसतन भारतीय केवल किसी क्विज शो में ही सुनता है। जी हां, ‘V4’ यानी वाइब्रेंट फोर नहीं, बल्कि ‘विसेग्राद ग्रुप’ (पोलैंड, हंगरी, चेक रिपब्लिक और स्लोवाकिया)। खबर आई है कि इनके साथ अब हमारे राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंध इतने ‘गहरे’ होने जा रहे हैं कि गहराई नापने के लिए नया पैमाना मंगवाना पड़ेगा।
ग्लोबल मैप पर ‘खोजो तो जानें’ प्रतियोगिता
जयशंकर जी ने बड़ी घोषणा की है कि अब इन चारों देशों के साथ हर साल विदेश मंत्रियों की बैठक होगी और एक बिजनेस फोरम भी सजेगा। कितना अद्भुत विचार है! अब हमारे देश का बेरोजगार युवा, जो चपरासी की नौकरी के लिए लाइन में खड़ा है, वह जल्द ही प्राग और बुडापेस्ट के व्यापारियों के साथ ‘स्टार्ट-अप’ पर चर्चा करेगा। वैसे, यह ‘V4’ सुनने में किसी नए मल्टी-विटामिन के कैप्सूल जैसा लगता है, जिसे खाने के बाद अचानक से ‘वैश्विक महाशक्ति’ होने का भ्रम होने लगता है। अब आम भारतीय को भले ही यह न पता हो कि स्लोवाकिया और स्लोवेनिया में क्या अंतर है, लेकिन हमारी कूटनीति के कैमरे में दोनों की तस्वीरें बिल्कुल साफ और चमकीली हैं।
डिफेंस डील और घबराया हुआ ड्रैगन
सबसे मजेदार बात तो यह है कि हम इन देशों के साथ ‘डिफेंस टाईज’ यानी रक्षा संबंधों को मजबूत करने जा रहे हैं। पोलैंड और हंगरी की सैन्य ताकत के सहारे अब भारत अपनी सीमाओं को सुरक्षित करेगा। सोचिए, स्लोवाकिया की सेना के खूंखार तेवरों की खबर सुनकर ही चीन और पाकिस्तान के सैन्य जनरलों की रातों की नींद उड़ गई होगी। आखिरकार, जब ‘कागजी समझौतों’ के शेर दहाड़ते हैं, तो पूरी दुनिया थर-थर कांपती ही है।
‘काक-वाणी’ का तो यही मानना है कि जब तक हमारे पास जयशंकर साहब जैसा शानदार अंग्रेजी बोलने वाला और पश्चिमी मीडिया को ‘कड़क’ जवाब देने वाला विदेश मंत्री है, तब तक हमें जमीन पर किसी बड़े बदलाव की जरूरत ही नहीं है। बस हर साल एक नया ‘फोरम’ बनाइए, शानदार तस्वीरें खींचिए, और टीवी चैनलों पर विश्वगुरु होने के सुखद एहसास की लोरी सुनकर सो जाइए। जय हो V4 की, और विजय हो हमारी कूटनीतिक हेडलाइंस की!
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