सुबह की पहली किरण के साथ जब आपके मोबाइल की घंटी बजती है, तो समझ लीजिए कि ज्ञान की गंगा सीधे आपके ‘फैमिली ग्रुप’ में उतर चुकी है। जी हां, हम बात कर रहे हैं विश्व की सबसे प्रतिष्ठित और बिना किसी परीक्षा के डिग्री बांटने वाली ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ की। यहां के डीन आपके पूजनीय फूफाजी और प्रोफेसर आपके चचेरे भाई हो सकते हैं। आज हम ‘काक-वाणी’ के इस विशेष अंक में व्हाट्सएप पर वायरल सच और झूठ का ऐसा पर्दाफाश करेंगे कि खुद मार्क जुकरबर्ग भी अपना सिर पकड़ लेंगे।
यूनेस्को का ‘विशेष’ पुरस्कार और राष्ट्रीय गान का गौरव
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का सबसे पसंदीदा और बारहमासी झूठ है – “यूनेस्को द्वारा भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित किया गया है।” कमाल की बात यह है कि यूनेस्को के पेरिस मुख्यालय को खुद नहीं पता कि वे कब और किसे यह पुरस्कार बांट रहे हैं। यूनेस्को ने तो अब सोशल मीडिया से हाथ जोड़ लिए हैं, लेकिन हमारे व्हाट्सएप के ‘परम ज्ञानी’ हर राष्ट्रीय पर्व पर इस मैसेज को कब्र से खोदकर बाहर निकाल लाते हैं। इस झूठ का सच सिर्फ इतना है कि यूनेस्को ऐसी कोई प्रतियोगिता आयोजित नहीं करता। हमारे राष्ट्रप्रेम को किसी व्हाट्सएप फॉरवर्ड के सर्टिफिकेट की जरूरत वैसे भी नहीं है!
नासा के वैज्ञानिक और नींबू-मिर्ची का जीपीएस ट्रैकर
दूसरा बड़ा दावा जो अक्सर वायरल होता है, वह है अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का भारतीय घरेलू नुस्खों के सामने नतमस्तक होना। व्हाट्सएप फॉरवर्ड्स के अनुसार, नासा ने माना है कि घर के दरवाजे पर नींबू-मिर्ची लटकाने से ब्रह्मांडीय किरणें (Cosmic Rays) वापस लौट जाती हैं। यही नहीं, कुछ साल पहले दो हजार के नोट में ‘नैनो जीपीएस चिप’ होने की अफवाह तो इतनी सटीक थी कि लोगों ने अपने नोटों की एक्स-रे जांच कराने की सोच ली थी। इस तरह के व्हाट्सएप पर वायरल सच और झूठ को देखकर नासा के वैज्ञानिक भी सोच रहे होंगे कि उन्हें अंतरिक्ष अनुसंधान छोड़कर सीधे भारतीय व्हाट्सएप ग्रुप्स को ही फॉलो कर लेना चाहिए।
11 लोगों को फॉरवर्ड करें, वरना मोबाइल ब्लास्ट हो जाएगा!
इस विश्वविद्यालय का सबसे खतरनाक वायरस है – “इस संदेश को तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक बड़ी खुशखबरी मिलेगी। न भेजने वाले का भारी नुकसान हुआ है।” यह डर और अंधविश्वास का ऐसा कॉकटेल है जिसे अच्छे-भले पढ़े-लिखे लोग भी ‘जोखिम न लेने’ के चक्कर में फॉरवर्ड कर देते हैं। सच तो यह है कि इसे न भेजने से सिर्फ एक ही चीज बचती है – आपके दोस्तों के मोबाइल का कीमती डेटा और उनका मानसिक संतुलन!
अंत में, ‘काक-वाणी’ की सलाह यही है कि जब भी आपके पास कोई ऐसी “ब्रेकिंग न्यूज” आए जिससे विज्ञान और इतिहास के नियम बदल रहे हों, तो अपनी उंगलियों को थोड़ा आराम दें। हर फॉरवर्ड किया गया मैसेज सच नहीं होता। अगली बार जब फूफाजी कहें कि यूनेस्को ने आपके परिवार को ‘सर्वश्रेष्ठ परिवार’ घोषित किया है, तो समझ लीजिए कि आज रात खाने में करेले की सब्जी बनी है!