सोशल मीडिया के युग में ज्ञान का सबसे बड़ा स्रोत ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ है, जहां डिग्री की जरूरत नहीं होती, बस एक चालू इंटरनेट कनेक्शन और अंगूठे की फुर्ती काफी है। हाल ही में इस महान विश्वविद्यालय ने अपना नया ‘फैक्ट-चेक’ एल्गोरिदम लॉन्च किया है। इस नए सिस्टम के अनुसार, किसी खबर के सच होने के लिए किसी सरकारी दस्तावेज या प्रामाणिक पत्रकारिता की जरूरत नहीं है। इसके लिए बस कुछ अनोखे और वैज्ञानिक रूप से ‘असिद्ध’ नियमों का पालन करना होता है।
नियम 1: ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ यानी ईश्वरीय सत्य
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के नए नियम के अनुसार, यदि किसी मैसेज के ऊपर ‘Forwarded many times’ (कई बार भेजा गया) लिखा है, तो वह संदेश सीधे देवलोक से उतरा हुआ माना जाएगा। उसे फैक्ट-चेक करने की गुस्ताखी कोई नहीं कर सकता। अगर कोई मैसेज आपकी चाची, फूफाजी और कॉलोनी के शर्मा जी ने एक साथ भेजा है, तो वह अल्बर्ट आइंस्टीन के सिद्धांतों से भी ज्यादा प्रामाणिक है। सत्यता की जांच का पैमाना अब लैब नहीं, बल्कि फैमिली ग्रुप का इनबॉक्स है।
नियम 2: नासा और यूनेस्को की असीम कृपा
अगर किसी वायरल खबर में ‘नासा’ (NASA) या ‘यूनेस्को’ (UNESCO) का नाम शामिल है, तो वह खबर ब्रह्मांडीय सत्य है। उदाहरण के लिए, “नासा ने दिवाली पर भारत का नक्शा अंतरिक्ष से चमकते हुए देखा” या “यूनेस्को ने भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ घोषित किया है।” नए फैक्ट-चेक विभाग का कहना है कि नासा के वैज्ञानिकों के पास और कोई काम नहीं है, वे दिन-रात भारतीय त्योहारों और संदेशों की पुष्टि करने के लिए अंतरिक्ष में दूरबीन लेकर बैठे रहते हैं। अगर किसी मैसेज में इन दोनों का नाम है, तो आंखें बंद करके विश्वास कर लें।
नियम 3: ‘शेयर न करने पर अनहोनी’ का डर
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के इतिहास में सबसे अचूक फैक्ट-चेक फॉर्मूला यही है। अगर किसी संदेश के अंत में लिखा है कि ‘इसे 11 लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी, न भेजने पर भारी नुकसान होगा’, तो वह खबर 100% सच है। इस तरह के संदेशों को झूठा साबित करने की हिम्मत तो देश की सर्वोच्च अदालत भी नहीं कर सकती। डर और अंधविश्वास का यह अद्भुत मिश्रण ही सोशल मीडिया का असली ‘सर्टिफाइड फैक्ट-चेकर’ है।
काक-वाणी का निष्कर्ष
तो प्रिय पाठकों, अगली बार जब आपके पास दो हजार रुपये के नोट में जीपीएस चिप होने या नींबू-मिर्ची से कोरोना भागने का मैसेज आए, तो अपने दिमाग का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। दिमाग का इस्तेमाल करना व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के नियमों के सख्त खिलाफ है। बस अपनी उंगलियों को कष्ट दें, ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाएं और इस महान ज्ञान गंगा के भागीरथ बनें। आखिरकार, सच वही है जो आपके पूर्वाग्रहों को भाए, बाकी सब तो विदेशी ताकतों की साजिश है!