व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का नया फैक्ट-चेक विभाग: अब सच वही जो फूफाजी को सही लगे!

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के चांसलर और डीन ने मिलकर आखिरकार एक नया ‘फैक्ट-चेक’ विभाग खोल ही दिया है। अब तक हम और आप बीबीसी, यूनेस्को और नासा के भरोसे बैठे थे, लेकिन अब ज्ञान की इस परम पाठशाला ने खुद का आत्मनिर्भर फैक्ट-चेक मैकेनिज्म तैयार कर लिया है। इस क्रांतिकारी सिस्टम का नाम है – ‘फूफाजी की अंतरात्मा’

कैसे काम करता है यह नया फैक्ट-चेक?

इस नए फैक्ट-चेक सिस्टम की तकनीक बेहद सरल, सस्ती और स्वदेशी है। इसके लिए किसी कोडिंग, एल्गोरिदम या गूगल सर्च की जरूरत नहीं होती। जैसे ही आपके पारिवारिक ग्रुप में कोई संदेश तैरता हुआ आता है, जैसे – “रात को हल्दी का पानी पीने से वाई-फाई की स्पीड बढ़ जाती है”, तो ग्रुप के सबसे वरिष्ठ सदस्य (अक्सर फूफाजी या ताऊजी) अपनी दूरबीन जैसी नजरों से उसे देखते हैं। अगर संदेश के अंत में ‘इसे 11 लोगों को भेजें, शाम तक शुभ समाचार मिलेगा’ लिखा है, तो वह तुरंत प्रमाणित (वेरिफाइड) मान लिया जाता है। यही इस यूनिवर्सिटी का सर्वोच्च ‘ब्लू टिक’ है।

यूनेस्को और नासा की नई भूमिका

इस नए फैक्ट-चेक विभाग के अनुसार, दुनिया के सारे महत्वपूर्ण और खाली काम यूनेस्को ही करता है। हाल ही में इस विभाग ने अपनी गहन रिसर्च से साबित किया है कि यूनेस्को ने भारत के राष्ट्रीय गान को ही नहीं, बल्कि ‘पड़ोस वाली मौसी के नींबू के अचार’ को भी दुनिया का सर्वश्रेष्ठ अचार घोषित कर दिया है। वहीं नासा के वैज्ञानिक भी अब अंतरिक्ष की खोज छोड़कर केवल यही रिसर्च कर रहे हैं कि ग्रहण के समय सूजी का हलवा खाने से कौन-कौन से ग्रह शांत होते हैं। नासा की इस ‘रिपोर्ट’ को फूफाजी ने खुद अपने हाथों से री-ट्वीट, सॉरी, फॉरवर्ड किया है।

तर्क करने वालों के लिए नो-टॉलरेंस पॉलिसी

इस नए फैक्ट-चेक विभाग का सबसे कड़ा नियम यह है कि तर्क करने वाले को तुरंत ‘बुद्धिजीवी’ या ‘ज्ञानचंद’ घोषित कर ग्रुप से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए। अगर आप किसी संदेश के वैज्ञानिक आधार पर सवाल उठाते हैं, तो एडमिन का अचूक ब्रह्मास्त्र चलता है – “लिखने वाले ने कुछ सोच समझकर ही लिखा होगा, तुम अपनी नासा वाली बुद्धि घर पर रखो।”

अंततः, ‘काक-वाणी’ आपसे यही अपील करती है कि अपने दिमाग के कपाट बंद रखिए, सुबह-शाम ‘सुप्रभात’ के चमकीले फूलों वाले संदेश भेजते रहिए और ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’ वाले संदेशों को ही परम सत्य मानिए। आखिर फूफाजी की अंतरात्मा कभी गलत नहीं हो सकती!

कागा जी