नमस्कार पाठकों! ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। आज हम उस गंभीर विषय पर बात करेंगे जिसके बिना हमारे देश के करोड़ों नागरिकों की सुबह की चाय फीकी रह जाती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं सोशल मीडिया पर फैलने वाले उस ज्ञान की, जिसे आधुनिक विज्ञान भी सलाम ठोकता है। हाल ही में व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के कुलपतियों ने ‘फैक्ट चेक’ का एक नया और क्रांतिकारी नियम खोज निकाला है।
फैक्ट चेक का नया फार्मूला: इमोजी और फॉन्ट साइज
पुराने जमाने के मूर्ख लोग किसी खबर को सच मानने के लिए सबूत और तर्क मांगते थे। लेकिन नए जमाने के सोशल मीडिया योद्धाओं ने इस थकाऊ प्रक्रिया को बायपास कर दिया है। अब फैक्ट चेक करने का तरीका बेहद सरल हो चुका है। अगर किसी मैसेज के अंत में दस तिरंगे, पांच हाथ जोड़ने वाले इमोजी और बोल्ड अक्षरों में ‘कृपया इसे देशहित में फैलाएं’ लिखा है, तो वह खबर सौ प्रतिशत प्रामाणिक है।
हमारे व्हाट्सएप चाणक्यों का दृढ़ विश्वास है कि अगर नासा (NASA) ने दिवाली की रात अंतरिक्ष से भारत की चमचमाती तस्वीर नहीं खींची, तो फिर नासा के होने का कोई मतलब ही नहीं है। यूनेस्को (UNESCO) का तो एकमात्र काम ही यही रह गया है कि वह हर दूसरे हफ्ते भारत के राष्ट्रगान या हमारी संस्कृति को ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करने का सर्टिफिकेट जारी करे।
गूगल की छुट्टी, सोसाइटी वाले ताऊजी का ज्ञान भारी
आजकल के पढ़े-लिखे नौजवान गूगल पर जाकर फैक्ट चेक करते हैं, जो सरासर समय की बर्बादी है। गूगल के पास वो दिव्य दृष्टि कहां, जो हमारी सोसाइटी के शर्मा जी या दूर के फूफा जी के पास है! गूगल आपको कभी नहीं बताएगा कि रात को सोने से पहले मोबाइल को तकिए के नीचे रखने से दिमाग की नसें ‘ब्लॉक’ हो जाती हैं और सुबह उठकर तांबे के बर्तन में नींबू पानी पीने से सातों जन्म के पाप धुल जाते हैं। यह परम ज्ञान तो केवल सुबह 5 बजे आने वाले ‘गुड मॉर्निंग’ के संदेशों में ही छिपा होता है।
सत्य की नई कसौटी: शेयरिंग इज केयरिंग
सोशल मीडिया पर फैक्ट चेक का सबसे आधुनिक सिद्धांत है—’शेयरिंग’। जो अफवाह जितनी तेजी से शेयर होगी, उसका सच होना उतना ही अनिवार्य माना जाएगा। अगर किसी पोस्ट में दावा किया गया है कि ‘आने वाले बुधवार को नासा दो घंटे के लिए गुरुत्वाकर्षण बंद कर रहा है, इसलिए सब लोग जमीन पर लेट जाएं’—तो आपको लेट ही जाना चाहिए। आखिर इतने सारे लोग बिना वजह तो फॉरवर्ड नहीं कर रहे होंगे!
इसलिए, अपने बुद्धिजीवी दिमाग को थोड़ा आराम दीजिए, तर्क की खिड़कियां बंद कीजिए और अपने अंगूठे को काम पर लगाइए। याद रखिए, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में शंका करना सबसे बड़ा पाप है और बिना पढ़े ‘फॉरवर्ड’ करना सबसे बड़ा पुण्य!