एक जमाना था जब बॉलीवुड में किसी फिल्म का हिट होना इस बात पर तय होता था कि पोस्टर पर किस ‘खान’ या ‘कपूर’ का चेहरा चमचमा रहा है। फ्राइडे रिलीज से पहले ही थियेटर्स के बाहर लंबी कतारें लग जाती थीं, सिर्फ हीरो का नाम देखकर। लेकिन भाईसाहब, अब हवा का रुख पूरी तरह बदल चुका है! हाल ही में इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट ने फिल्म जगत की इस कड़वी और मीठी सच्चाई पर मुहर लगा दी है। क्या बॉलीवुड अब वाकई ‘स्टार-पावर’ से आगे बढ़कर ‘फिल्म-फर्स्ट’ यानी कहानी-प्रधान युग में कदम रख चुका है? जवाब है- हां, और इसका सबसे बड़ा सबूत है हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म Stree 2 जिसने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया।
स्टार्स की फीस आसमान पर, पर थियेटर खाली!
पिछले कुछ महीनों में बड़े-बड़े बजट और भारी-भरकम स्टारकास्ट वाली फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी हैं। करोड़ों की फीस लेने वाले सुपरस्टार्स भी दर्शकों को थियेटर की कुर्सी तक खींचने में नाकाम रहे। जनता अब बहुत समझदार हो गई है। उसे सिर्फ स्क्रीन पर किसी बड़े हीरो का स्टाइलिश चश्मा पहनना या बिना लॉजिक की हवा में गाड़ियां उड़ाना पसंद नहीं आ रहा। दर्शकों को अब चाहिए एक ठोस कहानी, जो उन्हें बांधकर रख सके। काक-वाणी का साफ मानना है कि अब बिना सिर-पैर वाली मसाला फिल्मों का जादू हमेशा के लिए फीका पड़ चुका है।
‘Stree 2’ और ‘लापता लेडीज’ ने सिखाया असली सबक
जब थियेटर में Stree 2 रिलीज हुई, तो इसने साबित कर दिया कि कंटेंट ही असली किंग है। इस फिल्म में कोई पारंपरिक ‘मेगास्टार’ नहीं था, बल्कि इसकी यूएसपी थी इसकी अनोखी कहानी, मजेदार कॉमेडी और हॉरर का शानदार तड़का। ठीक इसी तरह, ‘लापता लेडीज’ और ‘मुंज्या’ जैसी फिल्मों ने बिना किसी शोर-शराबे के दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई। इन फिल्मों ने साफ संदेश दिया है कि अगर आपकी कहानी में दम है, तो दर्शक खुद-ब-खुद खिंचे चले आएंगे। अब असली ‘क्राउड पुलर’ कोई स्टार नहीं, बल्कि फिल्म का स्क्रीनप्ले है।
क्या अब सच में खत्म हो गया स्टारडम का दौर?
इसका मतलब यह नहीं है कि सुपरस्टार्स का वजूद ही खत्म हो जाएगा। स्टार पावर आज भी फिल्मों को एक बड़ी ओपनिंग दिलाने में मदद करती है, लेकिन फिल्म को आगे बढ़ाने का काम सिर्फ और सिर्फ कहानी ही कर सकती है। अब सुपरस्टार्स को भी अपनी साख बचाने के लिए अच्छी कहानियों की शरण में जाना ही होगा। केवल चेहरे के सहारे सौ करोड़ का क्लब हासिल करने के दिन अब लद चुके हैं। यह बॉलीवुड के लिए एक सुनहरा दौर है, जहां छोटी फिल्मों के पास भी इतिहास रचने का पूरा मौका है। अब सिनेमा में वही राज करेगा, जिसकी कहानी में दम होगा!
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