‘राजनीति से परे’ भारत-ईरान संबंध: जब चाबहार की कसमों में घुली कूटनीति की ‘चाय’!

कज़ान की ठंडी हवाओं में जब हमारे प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी और ईरान के नए नवेले राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान गले मिले, तो कूटनीति के गलियारों में ऐसी गर्माहट पैदा हुई कि ईरानी विशेषज्ञों को सीधे अध्यात्म की याद आ गई। एक ईरानी विशेषज्ञ ने तो कैमरे के सामने बड़े भावुक होकर कह दिया कि भारत और ईरान के संबंध “राजनीति से परे” हैं। वाह! सुनकर छाती चौड़ी हो गई। राजनीति के इस कलयुग में कोई तो है जो “राजनीति से परे” जाने की हिम्मत दिखा रहा है, वरना हमारे यहाँ तो दो विपक्षी नेता आपस में चाय भी पी लें, तो लोग उसमें आगामी चुनाव का घोषणापत्र ढूंढने लगते हैं।

जब ‘प्रतिबंध’ और ‘प्रेम’ का हुआ अनोखा मिलन

अब जरा इस “राजनीति से परे” वाले जुमले का असली अनुवाद भी समझ लीजिए। इसका सीधा सा मतलब है—जब-जब अमेरिका हमारी इस गाढ़ी दोस्ती पर अपनी तिरछी नजर डालेगा, हम और ईरान मिलकर कहेंगे, “अरे अंकल सैम, गुस्सा थूकिए! ये तो दिल का मामला है, राजनीति का इससे क्या लेना-देना?” चाबहार पोर्ट का विकास कोई व्यापारिक सौदा थोड़े ही है, वो तो दो पुराने पड़ोसियों के बीच का ‘सांस्कृतिक मिलन’ है। वैसे भी, जब ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों की तलवार लटकती है और भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की चिंता सताती है, तो ये संबंध अचानक इतने ‘पवित्र’ और ‘अध्यात्मिक’ हो जाते हैं कि इनमें मुनाफे का गणित देखना पाप लगने लगता है।

इजरायल, अमेरिका और ईरान: भारत का ‘बैलेंसिंग एक्ट’

दुनिया हैरान-परेशान है कि भारत आखिर यह जादू करता कैसे है? एक तरफ हम इजरायल के साथ ‘अभिन्न मित्रता’ का दम भरते हैं, दूसरी तरफ अमेरिका के साथ क्वाड (QUAD) में बैठकर रणनीतिक गलबहियां करते हैं, और फिर अचानक कज़ान में जाकर ईरान के साथ “राजनीति से परे” वाले भाईचारे का शंखनाद कर देते हैं। इसे कहते हैं शुद्ध भारतीय कूटनीति का ‘मल्टी-टास्किंग रायता’। यह रायता इतने सलीके से फैलाया गया है कि वाशिंगटन से लेकर तेल अवीव तक, सब बस सिर खुजलाते रह जाते हैं। मोदी जी की इस कला के आगे तो बड़े-बड़े जादूगर भी पानी भरें!

खैर, ‘काक-वाणी’ की कड़वी मगर सच्ची सलाह यही है कि कूटनीति के इन भारी-भरकम शब्दों पर ज्यादा भावुक होने की जरूरत नहीं है। “राजनीति से परे” का मतलब बस इतना है कि जब तक दोनों तरफ हित सुरक्षित हैं, तब तक शहनाइयां बजती रहेंगी। बाकी, जैसे ही अमेरिका ने अपनी भौहें थोड़ी और टेढ़ी कीं, यह “राजनीति से परे” वाला प्यार वापस “सांसारिक सीमाओं” में सिमट आएगा। तब तक के लिए, कज़ान की इस मुलाकाती चाय की चुस्कियों का आनंद लीजिए!


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कागा जी