जब भी देशप्रेम की बात आती है, तो हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी इस देशभक्ति को शब्दों की ताकत किसने दी? जी हां, हमारे प्यारे बॉलीवुड ने! ‘द न्यूज मिल’ की एक हालिया रिपोर्ट ने इस बात पर मुहर लगाई है कि कैसे बॉलीवुड फिल्मों ने पीढ़ियों से भारत की देशभक्ति की भाषा और परिभाषा को आकार दिया है। आज ‘काक-वाणी’ के इस खास मसालेदार बुलेटिन में हम इसी दिलचस्प और फिल्मी सफर की पड़ताल करेंगे।
मनोज कुमार की सादगी से सनी देओल का गदर आक्रोश
एक जमाना था जब देशभक्ति का मतलब मनोज कुमार की फिल्मों के सीधे-सादे, मिट्टी की सोंधी खुशबू से भरे गाने हुआ करते थे। “मेरे देश की धरती सोना उगले…” सुनकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता था। इस दौर की देशभक्ति में एक ठहराव था, एक सादगी थी और मातृभूमि के प्रति गहरा सम्मान था।
लेकिन 90 के दशक में जैसे ही सिनेमा का रुख बदला, वैसे ही देशभक्ति का तेवर भी पूरी तरह बदल गया। पर्दे पर जब दमदार एक्टर Sunny Deol ने कदम रखा, तो देशभक्ति को एक नया और आक्रामक रूप मिला। ‘बॉर्डर’ फिल्म का वह सीन भला कौन भूल सकता है, या फिर ‘गदर’ में जब उन्होंने पाकिस्तान की धरती पर गुस्से में हैंडपंप उखाड़ा था! “हमारा हिंदुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा” जैसे दमदार डायलॉग्स ने देश के युवाओं की रगों में बहते खून की रफ्तार को बढ़ा दिया। अब देशभक्ति सिर्फ शांति का प्रतीक नहीं रही, बल्कि ईंट का जवाब पत्थर से देने वाला जज्बा बन गई।
‘हाउ इज द जोश’ से ‘शेरशाह’ का नया स्वैग
वक्त ने एक बार फिर करवट ली और एंट्री हुई हमारी आज की सोशल मीडिया वाली नई पीढ़ी की। इस पीढ़ी को देशभक्ति में भी स्टाइल और ‘स्वैग’ पसंद है। फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ का वह कड़क डायलॉग “हाउ इज द जोश? हाई सर!” आज हर कॉलेज कैंपस से लेकर कॉरपोरेट दफ्तरों तक में गूंजता है। वहीं ‘शेरशाह’ में सिद्धार्थ मल्होत्रा के किरदार ने हमें सिखाया कि “ये दिल मांगे मोर” सिर्फ एक कोल्ड ड्रिंक की टैगलाइन नहीं, बल्कि तिरंगे के सम्मान के लिए जान न्यौछावर करने का आधुनिक मंत्र है।
सिनेमा और देशप्रेम का यह अटूट रिश्ता
चाहे वह आमिर खान की ‘रंग दे बसंती’ की बगावत हो, शाहरुख खान की ‘चक दे! इंडिया’ का सत्तर मिनट वाला भाषण हो, या फिर आज की आधुनिक एक्शन फिल्में, बॉलीवुड ने हर पीढ़ी को देश से प्यार करने का एक नया और अनोखा तरीका दिया है। यह सिनेमा ही है जिसने हमें सिखाया कि देशभक्ति सिर्फ सरहदों पर बंदूक थामने का नाम नहीं है, बल्कि यह हर आम नागरिक के दिल के कोने में धड़कने वाला जज्बा है।
तो दोस्तों, अगली बार जब भी आपके मुंह से अचानक “जय हिंद” या “हाउ इज द जोश” निकले, तो एक पल के लिए बॉलीवुड के उस पर्दे को भी शुक्रिया कह दीजिएगा जिसने इस जज्बे को आपकी जुबान का हिस्सा बनाया। आज आपके अंदर का जोश कितना हाई है? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!
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