अंधेरा
एक छोटा गांव जहां से हमेशा सुख-शांति से गुजरे वहाँ अब उजाला बढ़ता हुआ था। गांव वालों में नयी उमंगें हो गए थीए और सभी खुश थे। आसमान में एक लहर पल-पल परती जा रही थी।
धन चाहे कम हो, आराम से जिंदगी जी रहे थे हमारे ग़ैर-मुस्लिम पड़ोसी। हमारा गांव एक छोटासा सपना था। मगर हम उस घर में रहते थे जो सभी सपनों का ठिकाना होता है॥
सबसे पहले हम ने हमारे गांव में एक स्कूल बनने की योजना बनायी। उसके लिए हमने एक ख़ुशी के साथ बजट बना सेर गठित किया। लेकिन हम न समझे थे कि सफलता का मतलब आसानी स्कूल खोलने से नही होता।
एक सुबह जब स्कूल खोला गया तब उम्मीदों से भरी आवाज़ें तेज़ होती दिखाई देनी थी। सभी बच्चे आज स्कूल जाने के लिए उत्सुक थे। मगर समस्या थी कि टीचर नहीं थी। टीचर जल्दी ही देश से आना था, मगर पहले दो घंटे के लिए हमें अपने आपस में समझना पड़ा कि क्या कैसे किया जाएगा।
अंत में हम लोगों ने एकमत से यह निर्णय लिया कि हम ख़ुशहाली से खुशहाली की तरफ़ कदम उठाएँगे।
बच्चों को कामरे में बिठाया जा सकता था लेकिन टीचर नहीं थी। हम ने फ़ोटोकॉपीज़ का इस्तेमाल करते हुए आसानी से सभी केमिकल का चोरों संग्रह किया। बच्चे स्कूल से खुश उतरे और कुछ खुशियों से भरी घटनाओं के साथ उन्होंने अपने घरों की तरफ रुख किया।
फिर एक दिन अंधेरे के मौसम ने एक आवाज को आवाज़ बदल दिया। शाम हो चुकी थी और सभी लोग अपने घरों में थे। उन्होंने सोचा कि कुछ वजह आवाज़ नही सुस्ती हो रही है। उन्होंने जाँच की तो पता चला कि स्कूल में एक विदाई कार्यक्रम हो रहा था जहाँ सभी बच्चे और उनके परिवार काफी उत्सुक थे। उनसे जब अंदर जाने की कोशिश की तो लॉक से डर लगता था। उन्होंने महसूस किया कि कुछ खत्म हो गया था। मगर उने सोचा कि उन्हें उस स्थान से बदला निकालना पड़ेगा।
अगली सुबह सब जल्दी में खराब समय के बाद अपने घर छोड़ने लग गए। सभी बहुत उदास दिखाई देते थे। उनकी मन में सवाल था कि क्या अब हम सुखी नहीं रहेंग। मगर वह सोच से भी परे एक अभय था जो उन्हें बताता था कि सुख-दुख एक ही जीवन के हिस्से हैं। उनके मन में बस इतना ही था कि अब पुराना वक़्त जा चुका है। अब नयी शुरुआतें होनी चाहिए।
मगर और क्या बदलाव हो सकता था जब एक नई ज़िम्मेदारी ने हमें हमेशा के लिए बदल दिया। हम ने एको-फ्रेंडली उपकरण खरीदा जो हमारी हरे भरे धरती के लिए वास्तव में अच्छा नहीं था। मगर इस उपकरण के लिए हमें एक वास्तविक उत्पाद की आवश्यकता थी। हमने एक वृक्षारोपण कार्यक्रम शुरुआत किया और लगभग तीस वास्तु बच्चों ने अपनी स्कूल के पास से सड़कों को सजाया।
अब हमारे गांव में कुछ नई यात्राएँ हो रही हैं जो पहले सोचा भी नहीं जा सकता था। ईमानदार बनाने से लेकर नए स्कूल का शुरुआत करने तक अब हम खुश हो रहे हैं। आज हम अपने स्कूल के बच्चों के संग मिलकर खुश हैं। ये सब करने के लिए, हम ने एक-दूसरे का साथ दिया और अपने जीवन के एक हिस्से में इस गांव को एक न्यू लुक दिया।
अब हम अपने स्कूल के बच्चों के संग मिलकर खुश हैं। ये सब करने के लिए, हम ने एक-दूसरे का साथ दिया और अपने जीवन के एक हिस्से में इस गांव को एक न्यू लुक दिया।
यह थी कहानी अंधेरे की जो एक सुखी जीवन के एक हिस्से की कथानक है। नए संबद्धता का नाम हमेशा से रिश्तेदारों के बीच से बड़ा होता है। कोई भी एकल नहीं हो सकता है। यह सबसे अंत में हमें समझ आया था। यही कारण है कि हम उस स्थान से आगे बढ़े हैं जहाँ सब कुछ अहम है। पर आज उन्होंने ठीक तरीक़े से ठीक काम किया था। और जो भी जरुरत हो, इस अंधेरे में उन्होंने जो सीखा था। वैसे भी, सूरज पूर्व की तरफ उठता हुआ हमेशा से ही तो जगी है।