बॉलीवुड के ‘सिंघम’ यानी अजय देवगन जब भी बोलते हैं, सीधे निशाने पर बोलते हैं। हाल ही में उन्होंने हिंदी सिनेमा जगत की एक ऐसी दुखती रग पर हाथ रख दिया है, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को सोचने पर मजबूर कर दिया है। ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ को दिए एक इंटरव्यू में अजय ने सवाल उठाया कि आखिर एक हिंदी फिल्म पूरे भारत के दर्शकों को एक साथ कैसे पसंद आ सकती है? अब इस गंभीर और मजेदार मुद्दे पर हमारे ‘काक-वाणी’ के घोंसले में भी कांव-कांव चर्चा शुरू हो चुकी है!
अजय देवगन की उलझन: मुंबई के मल्टीप्लेक्स से गांव के सिंगल स्क्रीन तक का सफर
अजय देवगन ने अपनी बातचीत में साफ कहा कि भारत जैसे विविध देश में सिनेमा बनाना कोई बच्चों का खेल नहीं है। यहाँ हर सौ किलोमीटर पर स्वाद, संस्कृति और सोच बदल जाती है। ऐसे में एक ऐसी फिल्म बनाना जो मुंबई के किसी चमचमाते मल्टीप्लेक्स में पॉपकॉर्न खा रहे दर्शक को भी पसंद आए और उत्तर प्रदेश या बिहार के किसी छोटे से कस्बे के सिंगल स्क्रीन थिएटर में सीटी बजाने वाले दर्शक को भी झूमने पर मजबूर कर दे, वाकई लोहे के चने चबाने जैसा है।
अजय का यह सोचना बिल्कुल जायज है। आज के समय में दर्शक बंट चुके हैं। कोई कोरियन ड्रामा का दीवाना है, तो कोई बिल्कुल देसी मसालों से भरपूर फिल्में देखना चाहता है। ऐसे में ‘वन साइज फिट्स ऑल’ वाला फॉर्मूला अब काम नहीं कर रहा है।
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काक-वाणी की पैनी नजर से देखें तो आज का बॉलीवुड इसी पहेली को सुलझाने में पसीने बहा रहा है। एक तरफ जहां साउथ सिनेमा अपनी जड़ों से जुड़ी कहानियों को लेकर ‘पैन-इंडिया’ ब्लॉकबस्टर दे रहा है, वहीं हिंदी सिनेमा कभी-कभी ज्यादा ‘मॉडर्न’ या ‘शहरी’ बनने के चक्कर में देश के एक बड़े हिस्से से कट जाता है।
अजय देवगन खुद ‘दृश्यम’, ‘सिंघम’ और ‘तानाजी’ जैसी फिल्मों के जरिए हर वर्ग के दर्शकों की नब्ज टटोल चुके हैं। इसलिए जब वह इस चुनौती पर बात करते हैं, तो उसमें अनुभव का वजन होता है। उनका मानना है कि फिल्मकारों को अब अपनी कहानियों में ऐसा संतुलन बनाना होगा जो ग्लोबल होने के साथ-साथ पूरी तरह से लोकल भी हो।
खैर, अजय देवगन की इस कड़वी लेकिन सच्ची बात को सुनकर अब देखना यह होगा कि बॉलीवुड के बाकी फिल्ममेकर अपनी फिल्मों की रेसिपी में क्या बदलाव करते हैं। क्या वे वाकई ऐसी फिल्म बना पाएंगे जो हर दिल को छू जाए? सिनेमा की इस चटपटी दुनिया की हर खबर पर हमारी चोंच जमी रहेगी। तब तक के लिए जुड़े रहिए काक-वाणी के साथ!
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