Title: एक सफ़र – दिल्ली से देहरादून तक
एक दिन दिल्ली के महानगर के तनाव में उलझे एक आदमी ने तय किया कि वह शहर की जीवनशैली से थक गया है और उसे अपने विचारों और ख्वाबों से दूर हटकर कुछ समय के लिए आराम चाहता है। उसे यदि कुछ घूमने का मौका मिले तो हमेशा के लिए अपने नए विचारों और सोच के अविरत ध्यान में खो देगा। ऐसी ही सोच कर उसने फोन पर एक सफर प्लान किया।
उसने दिल्ली से देहरादून तक जाने का अनुरोध किया। उसकी इच्छा के अनुसार, वह रेलगाड़ी के लिए टिकट बुक करके अपने सफर की शुरुआत की। सफर शुरुआत होने से पहले ही उसे इस महान शहर से आराम मिल गया था। रेलगाड़ी में चढ़ने से पहले, उसने अपने मोबाइल फोन को बंद कर दिया ताकि वह इस सफर पर भावनात्मक तरीके से जुड़ सके।
दो घंटे के बाद, उसे वही लोग मिलते हैं जो वहां पर मिलने की उम्मीद नहीं थी। उसे पता चला कि वे एक ही क्लास में बैठे हुए थे। उससे बातचीत शुरू करने के बाद, उन्होंने अपना खान-पान साझा किया और एक दूसरे के साथ जीवन के तत्वों पर चर्चा की। दोस्त बनने का कोई पट्टा नहीं था, हालांकि वे एक-दूसरे के स्वभाव जानना चाहते थे।
सफर के दौरान, वे दोनों दीर्घकालिक संगीत का आनंद लेते रहे। रेलगाड़ी भी उतनी ही मजेदार होती है जितनी गंदी। उसे रेलगाड़ी के खराब हालात देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया।
सफर तक पहुँचने के बाद, उसे वह पानी पीने के लिए जाना था। लेकिन उसने वहां पहुँचते ही एक जगह देखी जो उसके दिल को छू गई। वह एक पहाड़ से बहुत ऊंचा था। उसे उस पहाड़ पर चढ़ने का डर भी था लेकिन उसे इस विचार ने शिखर प्राप्त करने के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया।
उसने एक रात के लिए कमरे का बुकिंग किया और बस स्टेशन पर बस के बारे में पूछा। इस वस्तुता को ध्यान में रखते हुए, वह सुबह जल्दी उठ कर बस लेने के लिए तत्पर था।
बस में बैठते ही उसे एक अन्य महसूस हुआ। एक अद्भुत अनुभव था जो उसे अपने दिल में हमेशा आवास देने वाला था। वह देखता था कि जंगल, दरिया और पर्वत एक साथ हो रहे हैं। मानो जैसे उसे अपनी ज़िंदगी के विकास के लिए मार्गदर्शन मिल गया हो। उसके इस अनुभव के बाद, उसे लगा कि दुनिया के सभी चीजें एक साथ जोड़ी जानी चाहिए।
बस से उतरने के बाद, उसे पहाड़ पर जाने के लिए देखा गया। उसने अपने प्राप्त कר सम्पूर्ण तैयारियों के साथ एक नहर होते हुए पहाड़ की और बढ़ाई। उसकी लालमिर्च करने वाली श्वसन उसे किसी भी तनाव से मुक्त करदेती थी। वह पहाड़ के ऊपर जाने में 2 घंटे लगा।
ऊपर पहुँचते ही उसने सही बात देखी। एक चित्र मुझे ऑटो जेनेरेट् करना होगा – बस में बैठते ही वह अपने दोस्तों को फ़ोटोस भेजता हुआ दिखता है और फिर हाथ में मोबाइल उठा कर कुछ टेक्स्ट लिखने लगता है।
चित्र मैंचुअली से थोड़ा-सा बेहतर होगा।
उसने कुछ एक प्राकृतिक सुंदरता में खो जाने वाले रास्तों का आनंद लिया था जो उसे पहाड़ के समान लगे। अपने स्पष्ट आकांक्षा को अपने जीवन के एक और पहलू के रूप में स्थापित करते हुए, उसने दिल्ली से देहरादून तक की यात्रा का अभिषेक कर दिया।
“इस महान यात्रा के आखिरी दिन, यह मुझे समझ में आ रहा है कि मैंने इससे कितना खोया था, लेकिन भारत की प्रकृति ने मुझे वापस उस पथ पर लाया, जहाँ मैं खोया हुआ था, अपने आप में शांति की खोज करता हुआ।”
उसके द्वारा पहाड़ पर जाने के बारे में लिखे गए स्वरों में विचारणियता थी। उसे लगा कि दुनिया की सभी चीजें एक साथ जोड़ी जानी चाहिए और उसे वास्तव में तरंगों की तरह समझना चाहिए।
उस पहाड़ पर खड़े होकर, वह अपने जीवन के नए मोड़ पर खुद को खोजता हुआ महसूस करता था। उसने देखा कि उसकी हालिया प्राप्त कर समुद्र के साथ जाने वाले अनुभवों ने उसे मार्गदर्शन दिया है। उसने इस शानदार पृथ्वी को और बेहतरीन बनाने के बारे में सोचना शुरुआत की थी।
एक सफर ने इसको सम्पूर्णता का अनुभव दिलवाया था!