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एक साहसी सीख किसी गांव में एक सम्पन्न लोगों का गृह

एक साहसी सीख
किसी गांव में एक सम्पन्न लोगों का गृह था। वह एक अमीर लोगों का समूह था जिन्होंने अधिकांश अपनी आय का उपयोग केवल अपनी आरामदायक जिंदगी के लिए किया था। लेकिन एक लड़की ने इस दोस्ती को बदलने का फैसला किया था।
उस लड़की का स्वभाव था अलग। वह चाहती थी कि वह बड़ी होते हुए दुनिया में व्यक्तिगत विकास करे लेकिन उसके लिए उसके माता-पिता का समर्थन नहीं था। उसके पास अपनी मानवीय सामाजिक ज़िम्मेदारियों के लिए समय नहीं था। नाम्रता से वह सभी के लिए खाने की चीज़ें दस्तकर्तियों के रूप में बांट दिया करती थी।
एक दिन उस लड़की मुरली ने एक बुढ़िया का पता लगाया जो गांव में सामाजिक असुरक्षित थी। उस बुढ़िया के तीन बच्चे थे जो चिंता में थे कि उनकी मां उन्हें खाना नहीं दे सकती। मुरली ने बुढ़िया को आश्वस्त करते हुए उनके लिए खाने का इंतजाम किया। इस हालत में मुरली के साथ कुछ अन्य लोगों ने भी मदद की।
इस उत्सुकता ने मुरली को यह सोचने पर विवश कर दिया कि अगर वह मदद और सामाजिक ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकती तो कहीं वह एक एंगियों में जा चूकी होती थी। मुरली ने इस समस्या का समाधान तलाशा और गांव के जीत करने वाले सबसे अमीर व्यक्ति से बात की। वह ने मुरली की बात सुनी और उसे समझाया कि सामाजिक ज़िम्मेदारी का दायित्व उत्सुकता में नहीं बल्कि निष्ठा और एक सही ज़िंदगी शैली में होता है।
मुरली ने समझ गई थी। वह सीख गई थी कि एक व्यक्ति का समाज में जीवन उत्साह के अतिरिक्त निष्ठा और लगाव होना भी आवश्यक है। उसे संघर्ष के साथ-साथ खुद को बढ़ाने के लिए अपने मानसिक और शारीरिक संतुलन का देखभाल भी करना चाहिए।
मुरली ने समझा कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए वह मन, शरीर और आत्मा के संतुलन को बनाए रखना चाहिए। वह एक साल के अन्दर केंद्रित करती है। वह स्वयं के बारे में सोचती हुई और तनाव मुक्त रहती हुई सभी के लिए अनावश्यक दिक्कतों से परे हो गई। उसकी आत्मा मुक्त हो गई थी।

मुरली ने देखा कि आधे से ज्यादा लोगों का संघर्ष यकीन नहीं करता है। उन्होंने अपने जीवन को एक सीख के रूप में लिया – संघर्ष के प्रतियोगिता में, आत्मा के संतुलन बनाए रखना अत्यधिक जरूरी है। एक जोखिम उन्नति के रूप कार्य के रूप में नहीं लिया जा सकता है। संघर्ष का सामना को सफलता तक पहुंचने के लिए उत्साह और आत्मविश्वास के साथ-साथ एक सही ज़िंदगी शैली में जीवन जीने की आवश्यकता होती है।
मुरली ने जाना कि इस एक से अधिक सिद्धांत के आधार पर वह आगे बढ़ सकती है। वह नहीं चाहती थी कि उसके जीवन की कहानी एक एंगियों में खत्म हो जाए। इसलिए वह उसी गांव में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने के लिए नेतृत्व के क्षेत्र में बढ़ती हुई। वह दूसरों को उत्साहित करने लगी थी और इसके लिए उसको यात्रा करते हुए अपने अधिकारों को निभाना पड़ा।
मुरली ने अपनी समस्याओं से नहीं भागा, बल्कि उन्हें सीधा सामने देखा और ठीक किया। उसने सीखा कि एक सफल जीवन के लिए व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ सामाजिक ज़िम्मेदारियों के साथ संगठित होकर आगे बढ़ना ज़रूरी होता है।्

कागा जी

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