‘धैर्य’ की मर्यादा लांघती भारतीय महिलाएं और हमारे बेचारे नेता!

वाह! तो विदेशी मीडिया ‘द गार्जियन’ को आखिरकार भारत में कुछ नया दिख ही गया। उनका कहना है कि भारत की महिलाएं बदलाव के लिए ‘अधीर’ यानी ‘इम्पेशेंट’ हो रही हैं। अब भला इस महान देश में ‘अधीरता’ की क्या जरूरत है? हमारे यहाँ तो सदियों से, धर्मग्रंथों से लेकर राजनीतिक भाषणों तक, सिर्फ एक ही पाठ पढ़ाया जाता है—’धैर्य रखो!’ लेकिन नहीं, इन आधुनिक महिलाओं को तो हर काम में जल्दबाजी चाहिए। सुरक्षा चाहिए, समानता चाहिए और वह भी इसी जन्म में! यह तो हमारी सदियों पुरानी ‘सब्र’ संस्कृति का खुला अपमान है।

सरकारी कैलेंडर और महिलाओं की ‘असमय’ मांगें

हमारे प्रिय भारतीय राजनेता दिन-रात इसी चिंता में दुबले हो रहे हैं कि आखिर इन महिलाओं को समस्या क्या है? सरकार ने उन्हें ‘लाडली बहना’ से लेकर ‘उज्ज्वला’ तक के फॉर्म भरवा दिए हैं, अब क्या उन्हें आराम से घर पर बैठकर इंतजार नहीं करना चाहिए? अब अगर वे हर छोटी-बड़ी बात पर सड़कों पर उतरकर सुरक्षा और न्याय की भीख मांगने लगेंगी, तो यह सीधे-सीधे देश की छवि को खराब करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश मानी जाएगी। आखिर हमारे सिस्टम में न्याय की एक गति तय है—बीस-तीस साल तो सामान्य बात है। इतनी सी बात के लिए इतनी ‘अधीरता’ दिखाना हमारे सुस्त और सुंदर सिस्टम की तौहीन है।

चुनावी वादों का अमृतकाल और ये बागी तेवर

नेताओं का मानना है कि महिलाओं को समझना वाकई रॉकेट साइंस से भी ज्यादा मुश्किल है। जब चुनाव आते हैं, तो हम उन्हें ‘देवी’ घोषित करते हैं, उनके नाम पर योजनाएं लाते हैं और घोषणापत्रों में गुलाबी वादों की बौछार कर देते हैं। अब देवी का दर्जा पाने के बाद भी वे इंसानों वाले बुनियादी अधिकार और सुरक्षा मांगें, यह तो शास्त्रों के खिलाफ है! ‘काक-वाणी’ को डर है कि अगर महिलाओं की यह अधीरता इसी तरह बढ़ती रही, तो हमारे राजनेताओं को वाकई काम करना पड़ जाएगा। उन्हें भाषणों के बदले परिणाम देने पड़ेंगे, जो कि हमारी महान लोकतांत्रिक परंपराओं के बिल्कुल खिलाफ है।

अंत में, हम उन तमाम आंदोलनकारी महिलाओं से हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं कि कृपया हमारे सिस्टम के ‘स्लो मोशन’ मोड का सम्मान करें। हमारे नेता जी अभी ‘अगले चुनाव’ के गणित में व्यस्त हैं। जब तक वे मुफ़्त के वादों का झुनझुना थमा रहे हैं, तब तक इस ‘अधीरता’ को ताले में बंद रखिए। गार्जियन वालों, अगली बार ऐसी ख़बरें मत छापना, वरना हमारे नेता इस अधीरता को भी ‘विदेशी साजिश’ घोषित कर देंगे!


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कागा जी