सुबह के साढ़े पांच बजते ही जब आपके फोन की घंटी बजती है, तो समझ लीजिए कि ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ का पहला पीरियड शुरू हो चुका है। परिवार के सबसे पूजनीय फूफाजी या ताऊजी द्वारा भेजा गया ‘गुड मॉर्निंग’ का गुलाब का फूल सिर्फ एक शुरुआत है। इसके पीछे छिपा होता है ज्ञान का वह महासागर, जिसके आगे हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिक भी घुटने टेक दें। आज ‘काक-वाणी’ की इस विशेष कक्षा में हम खोलेंगे इसी डिजिटल यूनिवर्सिटी की पोलपट्टी।
व्हाट्सएप का ज्ञान: जहां नासा और यूनेस्को रोज भारत को अवॉर्ड बांटते हैं
इस विश्वविद्यालय का सबसे पसंदीदा छात्र हमारा अपना देश है। हर साल दिवाली के अगले दिन नासा (NASA) अंतरिक्ष से भारत की एक ऐसी चमचमाती तस्वीर जारी करता है, जिसमें हमारा देश दीयों की रोशनी से जगमगा रहा होता है। असलियत यह है कि नासा के वैज्ञानिकों के पास और भी कई काम हैं, और वह वायरल तस्वीर वास्तव में 90 के दशक के किसी अनाड़ी ग्राफिक डिजाइनर की रंगीन कलाकारी होती है।
इसी तरह, बेचारे यूनेस्को (UNESCO) के पास भी कोई काम नहीं बचा है सिवाय इसके कि वह हर दूसरे हफ्ते हमारे राष्ट्रगान को ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ या हमारी मुद्रा को ‘सर्वश्रेष्ठ करेंसी’ घोषित करे। अगर आप इस बात को सच मानकर दोस्तों के ग्रुप में छाती चौड़ी कर रहे हैं, तो बधाई हो! आप इस यूनिवर्सिटी के मानद डीन बनने के हकदार हैं।
वैज्ञानिकों को फेल करता घरेलू नुस्खों का अनोखा भंडार
क्या आपको पता है कि कच्चे प्याज के साथ सेंधा नमक खाने से हर वायरस का खात्मा हो जाता है? व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स के पास हर उस बीमारी का अचूक इलाज है जिसका तोड़ मॉडर्न साइंस आज तक नहीं ढूंढ पाया। कैंसर से लेकर गंजेपन तक, हर समस्या का रामबाण समाधान रसोई घर के मसालों में दबा पड़ा है। डॉक्टर तो बस यूं ही लाखों की फीस वसूल रहे हैं, असली एमबीबीएस की डिग्री तो ‘फॉरवर्डेड’ मैसेज के पास है।
सच्चाई का कड़वा घूंट: फैक्ट-चेक का चश्मा
इस यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां किसी भी खबर की सत्यता जांचने की कोई जरूरत नहीं होती। नियम सीधा और सरल है – अगर मैसेज के ऊपर ‘Forwarded many times’ का ठप्पा लगा है, तो वह ब्रह्म वाक्य है। लेकिन जब हम फैक्ट-चेक का चश्मा लगाते हैं, तो पता चलता है कि जिस सोने की बारिश वाली तस्वीर को देखकर आप बाल्टी लेकर छत की तरफ भागे थे, वह दरअसल किसी हॉलीवुड फिल्म का पुराना एनीमेशन था।
तो अगली बार जब कोई ‘अंगूठा छाप’ वैज्ञानिक ज्ञान आपके इनबॉक्स में तैरता हुआ आए, तो अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें, न कि शेयर बटन का। क्योंकि अफवाह फैलाना बहुत आसान है, लेकिन काक-वाणी की तरह कड़वा सच बोलना हर किसी के बस की बात नहीं।