हमारे देश में ज्ञान के दो ही स्रोत बचे हैं। पहला—पुस्तकालय, जहां अब सिर्फ मकड़ियां जाला बुनती हैं। दूसरा—व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी, जहां हर सेकंड ज्ञान की ऐसी गंगा बहती है कि बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी अपना सिर पकड़ लें। हाल ही में इस महान डिजिटल विश्वविद्यालय ने अपना नया और क्रांतिकारी ‘फैक्ट चेक’ मैकेनिज्म लॉन्च किया है। अब आपको किसी खबर की सच्चाई जानने के लिए गूगल करने या किसी फैक्ट-चेकर वेबसाइट पर जाकर अपना कीमती समय बर्बाद करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ ही है असली सच
इस नए फैक्ट चेक सिस्टम के पहले नियम के अनुसार, यदि किसी मैसेज के ऊपर ‘Forwarded many times’ का डबल-तीर वाला निशान लगा है, तो वह संदेश परम सत्य है। विज्ञान भले ही लाख चीख-चीख कर कहे कि कोरोना काल में थाली बजाने से वायरस नहीं भागा था, लेकिन अगर परिवार के ग्रुप में फूफाजी ने लिख दिया है कि कंपन से वायरस मर गया था, तो उसे विज्ञान की नई थ्योरी मान लिया जाना चाहिए। इस नए अल्गोरिदम के तहत, किसी भी दावे की सत्यता इस बात से मापी जाती है कि उसे कितने ग्रुप्स में बिना पढ़े फॉरवर्ड किया गया है।
यूनेस्को और नासा की नई जुगलबंदी
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के नए फैक्ट चेक के अनुसार, दुनिया की दो ही संस्थाएं सबसे ज्यादा सक्रिय हैं—यूनेस्को (UNESCO) और नासा (NASA)। हर हफ्ते यूनेस्को भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित करता है, और नासा इस बात की पुष्टि करता है कि दिवाली की रात अंतरिक्ष से केवल भारत ही चमकता है। नया फैक्ट चेक नियम कहता है कि अगर किसी भी मनगढ़ंत मैसेज के आगे ‘यूनेस्को द्वारा प्रमाणित’ या ‘नासा का दावा’ लिख दिया जाए, तो वह खबर अपने आप आइंस्टीन के सिद्धांतों से भी बड़ी सच बन जाती है।
लॉजिक गया तेल लेने, भावनाएं हैं सर्वोपरि
इस नए फैक्ट-चेक का सबसे अनोखा पहलू यह है कि इसमें ‘तथ्यों’ की जगह ‘भावनाओं’ को रखा गया है। अगर कोई मैसेज पढ़ने के बाद आपके भीतर का राष्ट्रप्रेम या धार्मिक उत्साह हिलोरे मारने लगे, तो वह खबर स्वतः ही सत्य सिद्ध हो जाती है। ऐसे में सबूत या लॉजिक मांगना साक्षात बुद्धिजीविता का अपराध है, जिसके लिए आपको ‘ग्रुप से निष्कासित’ करने का कड़ा दंड मिल सकता है। तो देर किस बात की? अपनी बुद्धि को ताले में बंद कीजिए, ज्ञान के इस नए चश्मे को पहनिए और आंख मूंदकर हर फॉरवर्डेड मैसेज पर ‘जय हो’ लिखकर आगे बढ़ा दीजिए!