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शीत ऋतु की शुरुआत एक बार की बात है, दिसंबर का

शीत ऋतु की शुरुआत

एक बार की बात है, दिसंबर का महीना था, सदियों की सबसे ठंडी ऋतु शुरू हो चुकी थी। हर तरफ बर्फ की चादर बिछी हुई थी और ठंडी हवा चल रही थी। सभी लोग गर्म कपड़े पहनकर बाहर निकलने से घबरा रहे थे।

एक बच्चे का नाम रोहन था जो बेहद सक्रिय था। वह सभी से अलग था क्योंकि उसे बर्फ के सफेद मैदान से बहुत लगाव था। उसके पिता एक सैनिक थे जो बहुत पुरानी सेना में थे इसलिए रोहन को नई शहर के लोगों के साथ मिलना मुश्किल था।

एक दिन रोहन ने अपने नए दोस्त रहुल से मैदान में खेलने का आह्वान किया। रहुल ने स्वीकार कर लिया, लेकिन जब दोनों बाहर निकले तो ठंड की वजह से पैर थम गए।

रोहन ने कहा, “हम अभी भी खेल सकते हैं बस हमें उन्हें मजबूर करना होगा।”

दोनों ने अपने दोस्त को समझाने के लिए बहुत प्रयास किया। उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे वे ठंड से जल्दी से अपने शरीर को सामूहिक गर्मी चढ़ा सकते हैं जो जुर्रत चाहते हैं वे खेल सकते हैं।

न जाने कैसे रोहन और रहुल की टोली में कुछ लोग जुड़ेंगे? सभी लोग ठंड की वजह से घरों से बाहर नहीं जाते थे। रोहन और रहुल ने अपने दोस्तों से कहा कि वह अपने उन्हें ठंड से जल्दी से तारे लगाकर तैयार हो जाएं।

अगले दिन रात्रि को, जब ठंड ओत-प्रोत थी, रोहन ने अपने स्कूटर पर जाकर अपने दोस्तों को समझाया कि वे समूहिक रूप से गर्मी चढ़ा सकते हैं और ठंड से बच सकते हैं। रोहन और रहुल ने उनके लिए एक साथ दलदल अनुभव करने की योजना बनाई।

सभी लोगों ने साथ मिलकर खेलना आरंभ किया, धीरे-धीरे सभी लोगों को समूहिक तरीके से गर्मी चढ़ाया गया। सफेद मैदान एक संभावित भारतीय है जो ठंडा मौसम से बच सकता है। सभी लोग उमंग से भरपूर थे और वहीं से बातें करते रहे जब तक गर्मी सही रूप से लगेगी।

रोहन ने धीरे-धीरे अपने दोस्तों को ट्रेन खेलना शुरू कर दिया, जबकि ध्वनि के साथ। लोग खुश हो भी क्यों न हों ये बात हैं कि उनके दोस्तों ने उन्हें ये सब करने का मौका दिया था। ये संगठन में विश्वास समाज में विशेष रूप से उन भारतीयों के लिए है जो शीत ऋतु में ठंड से बचने के लिए निर्धारित साधनों का उपयोग नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा, सभी लोग खुश थे कि वह अपने दोस्तों के साथ एक साथ समय बिता रहे हैं।

ठंड की वजह से, प्लेग्राउंड पर अब बहुत कम लोगों की संख्या थी। रोहन धीरे-धीरे अपने दोस्तों को समझाना शुरू कर दिया कि बस उन्हें ठंड से लड़ना होगा जब तक सभी रंगोली से नीचे नहीं उतरते। समूहिक तरीके से सभी लोग गर्मी चढ़ा रहे थे, इसलिए ठंड से लड़ने की ज़रूरत नहीं थी। वे भौतिक श्रम से ाकमलता का अनुभव कर रहे थे।

मैं आशा करता हूं कि शीत ऋतु के अंत में, रोहन और रहुल ने अपने दोस्तों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़े और उनके लिए एक प्रोफेशनल फुटबॉल टीम खड़ी की। उन्होंने बताया कि वे खेल सकते हैं, यह फीसदी के सबसे ठंडे महीने में भी। अब वे समूहिक रूप से गर्मी चढ़ा सकते हैं और ठंड से बच सकते हैं। शीत ऋतु की सही तैयारी से, रोहन और रहुल ने अपने दोस्तों को एक बड़ा समूह बनाने का मौका दिया।

आखिर में रोहन और रहुल ने अपने दोस्तों से प्रेरणा दी और ठंड की वजह से हिमालय के प्रसिद्ध मैदान पर फुटबॉल टूर्नामेंट खेला जाना शुरू हुआ। सभी लोग एक साथ घुमने का आनंद ले रहे थे और ठंडी हवाएं फुटबॉल खेलते समय उनके चेहरों पर एक स्वर्गिय चमक फैलाती थीं।

यह महीना बहुत स्पेशल था क्योंकि रोहन और रहुल ने अपने दोस्तों के साथ एक बड़ा समूह बनाया था। वे अपने दोस्तों के साथ काम करना भी सीख रहे थे जो कुछ नए होते रहते थे। शीत ऋतु की महानता मुश्किल भी है, लेकिन रोहन और रहुल के जैसे साथी होने पर ऐसा लगता है कि इसमें कुछ खास बात है।

ये था शीत ऋतु की शुरुआत का कहानी जिसके बदलते सिरे से रोहन ने अपने दोस्तों के लिए डबल बैडल की पहली उत्तम योजना बनायी। और आखिर तक उसने अपने दोस्तों को एक साथ खुश रखने का प्रयत्न किया।

कागा जी

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