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अटल बिहारी की कहानी: दिल से देशी अटल बिहारी वाजपेयी किस्से

अटल बिहारी की कहानी: दिल से देशी

अटल बिहारी वाजपेयी किस्से कहने में बेशक माहिर थे, लेकिन उनकी असली कहानी शायद ही किसी को मालूम होगी। वह जिन्हें ‘अटल जी’ के नाम से जानते थे, वे एक बहुत ही खूबसूरत धरोहर बन कर रह गए हैं। उन्होंने कबीर के पंथ का अनुसरण किया और संगीत के माध्यम से लोगों के मन में देशभक्ति का ज्वाला उत्पन्न किया।

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को जबलपुर शहर में हुआ था। इनके पिता कस्तूरी देवी नाम की एक महान व्यक्तित्व थीं। अटल जी के घर बचपन से ही जेल में जाना एक रूढ़िवादी परिवेश में था।

बचपन में अटल जी शायद ही कोई दुनिया का बच्चा था जो ना कभी हंसा हो। बात कुछ इस तरह से थी कि एक दिन भी ऐसा नहीं होता था जब अटल जी अपने मुँह से ठीक से एक शब्द तक नहीं बोल पाते थे।

इस शब्दमुखी की समस्या निदान तक का सफर आरंभ हो गया जब अटल जी एक दफ़ा अपनी माँ से मिलने के लिए जेल में गए थे। जेल के सुरक्षा व्यवस्था के कारण, उन्हें ये सौभाग्य नहीं मिलता था कि वह अपनी माँ से मिल सकें। इसी कारण वे उनके सामने बड़े बड़े शब्दों का अभ्यास करने लगे। ये अथर्व वेद के श्लोक ‘अथ सोमम दधिक्रावणं प्रशस्त’ से उठाए गए एक शब्द ‘प्रशस्त’ से उन्हें मदद मिली।

शब्दों के खोज में, उन्होंने संगीत का सहारा लिया। अपनी खुशियों और दुःखों का आवाज हर रात उनके सुनहरे नाले से निकलता था। वह अपनी माँ से भी चुकाने वाले पत्रों को संगीत के माध्यम से दिल की बात सुनाते थे।

इसी में बचपन गुजर गया और अटल जी ने संगीत की दुनिया में अपनी जगह बनाई। संघर्ष और कठिनाई मिलती जुलती थी, लेकिन उन्होंने संगीत के माध्यम से लोगों को जोड़ा।

अटल जी ने संगीत को संघर्ष का मध्यम बनाया था। उन्होंने कई दुर्गम समयों में भाग लिया था, जब उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्हें ये स्थिति भी बर्दाश्त करनी पड़ी जब वे एक बीमारी से पीड़ित हुए थे, जो कि उनके गले को परेशान कर रही थी। लेकिन वे हार नहीं माने और कठिनाई से लड़ते रहे।

हर एक संघर्ष से अटल जी और ताकतवर हुए। पत्रकारिता, राजनीति, मूल्यांकन, संगीत पर वे बहुत कुछ लिखे और संदेश दिए। उन्होंने अपनी स्वरगति से पहले देश के लिए कुछ रचनाएँ लिखीं। वे दूसरों के लिए जितना काम करते थे, इतने उन अपने स्वार के लिए कुछ करते नहीं थे।

अटल जी के संघर्ष के बावजूद, वे एक संपूर्ण भारतीय बने रहे थे। उन्होंने देशभक्ति और सेवा से प्रेरित होकर संघर्ष को अपना ध्येय बनाया था। वे अपनी अंतिम सांस भी लेते समय संगीत की धुन को अपनी छाती में समा गए।

अटल जी हमारे देश के वो स्वर थे जो हमारी मिट्टी की महक को बदलने का मशविरा दे सकते थे। हमें उनकी कहानी से सीख मिलती है कि संघर्षों से नहीं हारना चाहिए, बल्कि इन संघर्षों का सामना करना चाहिए।

आज उनकी याद में, हम अटल जी को धन्यवाद देते हैं जिनकी वजह से हम आज इतनी समृद्ध, समस्याओं से भरी जिंदगी जी रहे हैं। उन्होंने हमें एक शक्तिशाली देश का जोश दिया जो आज हमें दुनिया का सबसे सशक्त देश बनने की दिशा में ले जा रहा है।

कागा जी

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