अनुराग कश्यप का ‘गैंग्स ऑफ तंज’! बोले- बॉलीवुड पर भक्ति और देशभक्ति का कब्जा, ‘लिटिल थॉमस’ को कौन पूछेगा?

बॉलीवुड के सबसे बेबाक और ‘अतरंगी’ निर्देशकों में से एक अनुराग कश्यप जब भी बोलते हैं, तो बी-टाउन के गलियारों में तहलका मचना तय होता है। इस बार अनुराग साहब एक नई और छोटी फिल्म ‘लिटिल थॉमस’ (Little Thomas) के ढाल बनकर सामने आए हैं। रसिका दुगल और गुलशन देवैया स्टारर इस फिल्म का समर्थन करते हुए अनुराग ने बॉलीवुड के मौजूदा ढर्रे पर करारा तंज कसा है।

देशभक्ति और धार्मिक फिल्मों का शिकंजा?

अनुराग कश्यप का मानना है कि इन दिनों हिंदी सिनेमा पर देशभक्ति और धार्मिक/भक्ति रस से भरपूर फिल्मों का एक ऐसा शिकंजा कस चुका है, जिसमें सादगी भरी और इंसानी रिश्तों पर बनी फिल्मों को सांस लेने की जगह भी नहीं मिल रही है। अनुराग ने साफ शब्दों में कहा कि हमारी इंडस्ट्री इस समय ऐसे दौर से गुजर रही है जहां दर्शक और मेकर्स केवल बड़े ड्रामे, राष्ट्रवाद और धार्मिक विषयों के पीछे भाग रहे हैं। ऐसे माहौल में ‘लिटिल थॉमस’ जैसी मासूम और दिल को छू लेने वाली फिल्में दबकर रह जाती हैं।

‘लिटिल थॉमस’ के लिए अनुराग का बेबाक समर्थन

अभिनेता गुलशन देवैया और रसिका दुगल के बेहतरीन काम की तारीफ करते हुए अनुराग ने कहा कि ‘लिटिल थॉमस’ जैसी फिल्में ही असली सिनेमा की आत्मा हैं। यह फिल्म एक परिवार की बेहद खूबसूरत और संवेदनशील कहानी बयां करती है। अनुराग ने दुख जताते हुए कहा कि आज ऐसी फिल्मों को प्रमोट करने के लिए कोई बड़ा मंच आसानी से तैयार नहीं होता, क्योंकि पूरा बाजार सिर्फ एक ही ट्रेंड के पीछे पागल है। उन्होंने सिनेमा प्रेमियों से अपील की है कि वे ऐसी कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों को थिएटर में जाकर देखें।

काक-वाणी का नजरिया

अब ‘काक-वाणी’ की कांव-कांव पर गौर करें तो अनुराग कश्यप के इस बयान में दर्द भी है और कड़वी सच्चाई भी! भारी-भरकम बजट, ऊंचे राष्ट्रवादी नारों और धार्मिक महागाथाओं के इस दौर में छोटी और प्यारी फिल्में वाकई गुमनामी के अंधेरे में खोने लगती हैं। अब देखना यह है कि अनुराग की इस आवाज के बाद क्या जनता जनार्दन ‘लिटिल थॉमस’ को अपना प्यार देने थिएटर तक खिंची चली आएगी या यह फिल्म भी ट्रेंड के आंधी में बह जाएगी!


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कागा जी