दुनियाभर के लोकतंत्र की चिंता में दुबले हो रहे कतर के हमारे प्रिय स्वयंभू रक्षक ‘अल-जज़ीरा’ ने एक बार फिर भारत के भविष्य की सटीक भविष्यवाणी की है। इस बार उनकी दूरबीन में कोई बड़ा राजनेता या आंदोलनकारी नहीं, बल्कि भारतीय रसोई का सबसे पुराना और जुझारू नागरिक आया है—कॉकरोच! जी हां, अल-जज़ीरा का मानना है कि भारत का यह ‘कॉकरोच आंदोलन’ जल्द ही प्रधानमंत्री मोदी और उनकी अजेय समझी जाने वाली भाजपा को घुटने टेकने पर मजबूर कर देगा। ‘काक-वाणी’ इस महान वैश्विक पत्रकारिता को दूर से ही दंडवत प्रणाम करती है।
बच कर रहना मोदी जी, अब रसोई घर से क्रांति आ रही है!
जब देश में विपक्ष मुद्दों की भारी कमी से जूझ रहा हो, तब विदेशों में बैठे हमारे परम शुभचिंतकों को चींटी से लेकर कॉकरोच तक में क्रांति की चिंगारी दिखने लगती है। अल-जज़ीरा के विश्लेषकों का मानना है कि ये कॉकरोच असल में शोषितों के सबसे बड़े प्रतीक हैं, जो बिना किसी लाठी-चार्ज से डरे, ‘हिट’ और ‘बेयॉन’ की जहरीली बौछारें सहते हुए भी डटे रहते हैं। अब देखना यह है कि मोदी जी इस भयानक ‘कीट-क्रांति’ से कैसे निपटेंगे। क्या अमित शाह अब कॉकरोचों के खिलाफ यूएपीए (UAPA) लगाएंगे? या फिर इनके पीछे भी किसी ‘विदेशी टूलकिट’ का हाथ घोषित कर दिया जाएगा?
क्या भाजपा को बनाना पड़ेगा नया ‘पेस्ट कंट्रोल’ सेल?
राजनीतिक गलियारों में फुसफुसाहट तेज है कि भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार अब चुनावी रैलियों का खाका तैयार करने से ज्यादा ध्यान अपने दफ्तरों के पेस्ट कंट्रोल पर दे रहे हैं। कहीं कोई विपक्षी कॉकरोच भाजपा की ‘चाणक्य नीति’ के पन्नों को ही न कुतर जाए! उधर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस रिपोर्ट के आते ही न्यूयॉर्क टाइम्स और बीबीसी भी गहरे डिप्रेशन में चले गए हैं कि आखिर यह ‘कॉकरोच’ वाला मास्टरस्ट्रोक उनके दिमाग में पहले क्यों नहीं आया। वे अब इस सोच में डूबे हैं कि इस छह पैरों वाले आंदोलन पर अपनी तीन-भाग वाली डॉक्यूमेंट्री कब और कैसे रिलीज की जाए।
सचमुच, भारतीय लोकतंत्र की रग-रग को इतनी गहराई से समझने के लिए कतर की ठंडी रेत और एयर-कंडीशनर वाले स्टूडियो से बेहतर और क्या जगह हो सकती है!
‘काक-वाणी’ की मुफ्त सलाह
अंत में, ‘काक-वाणी’ मोदी जी को यही मुफ्त सलाह देगी कि वे जल्द ही अपने ‘मन की बात’ का एक पूरा एपिसोड इन छह पैरों वाले नन्हे क्रांतिकारियों के नाम समर्पित कर दें। आखिर, जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया आपके खिलाफ चींटियों और कॉकरोचों को भी विपक्ष की सेना बनाकर खड़ा करने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि आपकी लोकप्रियता वाकई ब्रह्मांडीय स्तर पर पहुंच चुकी है!
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