Title: आदमी और उसकी बेटी
जीवन का सफर कितना अजीब है। कुछ लोग इसे दौड़ने वाले रेल मार्ग की तरह इस्तेमाल करते हैं, कुछ बस की तरह होते हैं जो हर पत्थर को बोर्ड बदलते रहते हैं और फिर कुछ गाड़ी की तरह होते हैं जो फिर से शुरू होती है सारी कहानियों का आदमी।
राजेन्द्र नाम के एक आदमी भी गाड़ी की तरह था। उनके जीवन में कई बार से फिर से शुरू होता रहा था, वो कुछ ना कुछ सीखते रहें थे, बदलाव करते रहते थे और फिर से शुरू होते रहते थे। उनकी पत्नी उनसे नाराज होती रहती थी लेकिन उनके पास एक बेटी थी जो उनके साथ ही साथ सभी मुश्किलों में भी खुश रहती थी।
राजेन्द्र को अपनी बेटी पर बहुत गर्व था। वो उनके जीवन की एकमात्र लम्बी शाखा थी। उसे देख कर उन्हें हर मुश्किल अधिक से अधिक कंट्रोल करने का रास्ता मिलता था। बेटी को देखकर उन्हें खुशी होती थी लेकिन दिन, एक दिन उन्हें कोई संदेह हुआ। उन्होंने अपनी बेटी को उनके साथ व्यवसाय में ले जाने के लिए लिया।
बच्ची जूझती गर्मी में अपनी असामयिक वस्तुओं से घबरा गई। वो उन्हें हटाने के लिए करती रही, लेकिन उनका पिता उन्हें तनी वहमात्मक होने के लिए डांट देता रहा। उस दिन से राजेन्द्र की बेटी उनसे बात नहीं करती थी। उसे यह लगा कि उसके पिता उसकी कोई बात नहीं सुनते और नहीं समझते थे। वो कुछ ऐसा था जो उसके समीप आने के बाद भी कुछ नहीं समझता था।
राजेन्द्र भी दुखी होता था लेकिन वो अपने काम करते रहते और बेटी से दूर रहते थे। फिर एक दिन उसे एक इशारा मिला। वो अपनी बेटी को सुला कर उनके कमरे से निकले और समय से पहले वापस आए। कुछ दिनों तक वो यहीं बैठा रहता जब तक कि बेटी उससे बात नहीं करती और तब तक जब तक उसे भिड़ते ना देखें।
फिर एक दिन बेटी ने उससे बात की। उसने अपने पिता से यह पूछा कि उसकी बात सुनते हो, तो सिर्फ जब आप नींद में होते हो? वो अपने पापा से बातें करना चाहती हैं, लेकिन उसे लगता है कि उन्हें उसके साथ दिन भर बिताना नहीं चाहिए। उसे लगता है कि उसका पिता उससे नाराज हो गए हैं लेकिन वो जानता नहीं कि बेटी के मन में क्या है। उसे अब उद्देश्य मिल गया था।
बेटी ने बातें करना शुरू कर दी लेकिन उसे मलूम नहीं था कि निश्चित रूप से उसके पापा क्या करेंगे। बेटी को बेहद डर था कि उसे एक दिन कुछ हो जाएगा, लेकिन उसे यह भी पता था कि उसे अपने पिता के साथ रहना होगा।
एक दिन, उसने अपनी पिता से यह पूछा कि अगर वो लम्बे समय तक गांव में होते हुए लोगों को सस्ती दवाइयों की तलाश करने में मदद कर सकते हैं, तो क्या यह उन्हें खुश कर सकता है? राजेन्द्र उसे हँसते हुए जवाब देते हुए बोले। बेटी, तुमने मुझे बहुत खुश कर दिया।
बच्ची ने उसे यह बताया था कि कई लोगों को दवाइयों के लिए जरूरत है लेकिन उन्हें सस्ती दवाइयों की तलाश नहीं मिलती है। उसने अपने पिता से आग्रह किया कि वो उन लोगों की मदद करें। उसके पापा ने उसे अपना सपना बताया: कि वो आगे जाकर सस्ती दवाइयों और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करते हुए गरीब लोगों की सेवा करें। बेटी ने सबसे पहले उद्यम की शुरुआत की।
बेटी ने उसके ऐसे संगठनों का पता लगाया, जो सस्ती दवाइयों की सूची बनाते हैं। उसने इस सूची पर काम किया, कई समीक्षाएं और अध्ययन किए, और उसके पापा ने सभी शेयर खरीदे जो मात्रा में उनके सामने थे।
उस दिन से, उन्होंने कई संगठनों की मदद की और उनके साथ रहा और उन्हें सस्ती दवा उपलब्ध कराने में मदद की। राजेन्द्र की बेटी अब सस्ती दवाइयों के मुद्दे पर ट्रेनिंग और सम्मेलन आदि में सक्रिय रहती थी।
राजेन्द्र की बेटी ने उसकी कोशिशों से लोगों का अनुभव सुधार दिया। उसे नहीं पता होता कि कौन से सस्ती दवाई काम कर रही है और नहीं होता कि उसे प्रभावित करने वाली कोई दवा आई है या नहीं है।
राजेन्द्र ने खुशी से बेटी को देखा कि वो आज उसी समाज को पैदा किया जिसे उसे सहयोग देने का मौका मिला था। उसने अपने पापा के सपनों को पूरा करने में मदद की और उसने इस उत्साह से जीवन को थामा कि नहीं माना कि उसे नियमित रूप से सफलताओं से पूरा होते हुए एक हफ्ता भी नहीं हुआ है।