Title: एक अनोखा यात्री
एक सुबह, एक यात्री अपनी यात्रा के लिए प्रस्थान करता है। यह यात्री अनोखा है, उसका नाम तो कोई नहीं जानता है। वह अपनी जोरदार घोड़ी पर बैठा हुआ था। उसके साथ उसका शिकारी भी था। वह शिकारी सिर्फ अपने नाम से जानता जाता है, वो है रणवीर सिंह। ये दोनों बहुत कुछ सवारियों के समान थे।
यात्री ने फैसला किया था कि अगले तीन दिनों में वह एक ढेर की खोज में जाएगा। रणवीर सिंह भी उसके साथ चलेगा। उन्होंने खूब सारी तैयारी की थी। यात्री अपने बड़े बंगले से निकल गया। रणवीर सिंह उसके पीछे बड़े ही ढंग से आता हुआ नजर आया।
अगले तीन दिन यात्री और रणवीर सिंह ढेर की खोज में जाया करते थे। इस साल वो एक नए जंगल के खोज में जा रहे थे। यात्री ने सोचा कि यह बहुत ख़ास मौका होगा। रत्नों और खास गुणवत्ता के पत्थरों की हुड़दंगी में, वह अपनी खोज को आगे बढ़ा रहा था।
एक दिन रात ढेर पर हुए। उन्होंने अपनी टेंट लगाई और खाने का भोजन बनाने के लिए अपने चुल्हे का इस्तेमाल किया। खाने के बाद दोनों सो गए। सुबह जब यात्री उठकर देखा तब वह हैरान हो गया। उसकी अंखों में उसके दिमाग में आ जाने वाली बातों के कैरीन होते हुए एक बेहद खोजी अभियांता की तरह की जानकारी थी।
तब उसे मालूम हुआ कि रणवीर सिंह वहां नहीं हैं। वह खुद से सोचता है कि शायद वो अपने काम घटने के कारण अफ़सरत में वहां नहीं आ सके होंगे। वह चिंतित हुई और परेशान था। तब यात्री ने निश्चय किया कि उसके सब सामान को उठाने का एक प्रयास हो ना चाहिए। अब वह अपनी आगे की खोज में एकल हो गया था।
वह ढेर के कुछ हिस्सों की तलाश कर रहा था। यहाँ तक कि एक खेल मानव को भी खाने के लिए पेश किया गया था। यात्री के सामने एक बड़ा हिरण था। यह थोथा सा था, लेकिन उसके सिर पर एक स्वर्ण मुकुट था। यात्री ने अपना बाँचा चलाकर उसे पकड़ लिया। अचानक कुछ तोड़-फोड़ हुई और उसे हिरण सौंपा गया था। यह अनोखा हिरण था, इसलिए समुद्र तल से भी यह बेहद खास था। यात्री ने उसे लेकर चल पड़ा।
रास्ते में वह ढेर से गुजरता रहा था। इस दौरान उसे अनेकों मशहूर स्थानों पर जान पड़ी। जयपुर, अखबरपुर, जयशंकरपुर, इंदौर, देव बड़ा था। उसे इस तरह की खोजों में बड़ी मकसद थी। वह कुछ दिनों के लिए इस तरह की खोजों में लगा रहा था। इस दौरान उसे अपने जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिला।
उसे मुख्य रूप से यह पता चला कि सफलता सफर नहीं है, बल्कि सफर खुद ही सफलता होता है। वह जो भी चीजें सीखी, उन्हें याद रखने का एक खास तरीका होता था, उसने उन्हें दायरे में लिखा था। इस प्रकार उसे अपनी यात्रा को आगे बढ़ाने में मदद मिलती रही।
बहुत समय बाद, यात्री हिरण को साथ लेकर उसके घर में वापस आया। इस दौरान उसे बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। यह हिरण उसकी यात्रा का निशान था और उसने बड़े संघर्षों में इसे पाया था।
इससे सीख मुख्य रूप से यह है कि सफलता के लिए मन को अथक रखना पड़ता है। एक सफल यात्री कभी संघर्ष की कमी की तलाश नहीं करता और इसे समझता भी है कि सफलता के लिए उस्मानी रूप से लड़ाई देनी पड़ती है।
मेरी कहानी यही खत्म होती है। उम्मीद है कि आपको अच्छा लगा होगा।