क्या खत्म हो रहा है बॉलीवुड सुपरस्टार्स का जलवा? अब ‘स्टार पावर’ नहीं, ‘कहानी’ है असली किंग!

बॉलीवुड में एक दौर था जब सिर्फ पोस्टर पर किसी सुपरस्टार का चेहरा देखकर ही थिएटर के बाहर टिकटों के लिए लंबी कतारें लग जाती थीं। लेकिन क्या अब वह दौर बीत चुका है? इंडिया टुडे की हालिया रिपोर्ट ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या हिंदी सिनेमा अब Bollywood Star Power के दायरे से बाहर निकलकर ‘फिल्म-फर्स्ट’ यानी कहानी के युग में कदम रख रहा है? जी हां, काक-वाणी के इस खास बुलेटिन में आज हम इसी दिलचस्प बदलाव का पोस्टमार्टम करेंगे!

सिर्फ नाम से नहीं चलेगी दुकान, अब काम दिखाना होगा!

वह दिन अब हवा हो चुके हैं जब बड़े सुपरस्टार्स का नाम ही फिल्म को सौ करोड़ के क्लब में पहुंचा देता था। आज का दर्शक समझदार और थोड़ा बेरहम भी हो चुका है। अगर कहानी में दम नहीं है, तो स्क्रीन पर कितनी भी बड़ी स्टार कास्ट क्यों न चमक रही हो, फिल्म पहले वीकेंड के बाद ही औंधे मुंह गिर जाती है। हाल के दिनों में कई बड़े बजट और भारी-भरकम स्टार्स वाली फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर जो हश्र हुआ है, वह इस बात का साफ सबूत है कि सिर्फ Bollywood Star Power के भरोसे अब नैया पार नहीं होने वाली।

छोटे बजट और बड़ी कहानी का नया दौर

दूसरी तरफ, जरा उन फिल्मों पर नजर डालिए जिनमें कोई तथाकथित ‘सुपरस्टार’ नहीं था। ‘लापता लेडीज’, ’12th फेल’, और ‘मुंज्या’ जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर जो गदर मचाया है, उसने इंडस्ट्री के बड़े-बड़े पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इन फिल्मों की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि असली ‘सुपरस्टार’ अब फिल्म की स्क्रिप्ट और स्क्रीनप्ले हैं। दर्शक अब थियेटर में फिजूल का शो-ऑफ नहीं, बल्कि ऐसी कहानियां देखना चाहते हैं जो उनके दिलों को छू सकें।

ओटीटी (OTT) ने बदला दर्शकों का मिजाज

इस बड़े बदलाव का श्रेय काफी हद तक ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को भी जाता है। घर बैठे दुनिया भर का बेहतरीन सिनेमा देखने के बाद भारतीय दर्शकों का स्वाद बदल चुका है। अब वे घिसे-पिटे फॉर्मूले और बिना सिर-पैर के एक्शन से बोर हो चुके हैं। उन्हें अब लॉजिक, इमोशन और शानदार एक्टिंग की तलाश रहती है।

तो क्या सुपरस्टार्स का दौर पूरी तरह खत्म हो गया है? ऐसा बिल्कुल नहीं है। स्टार्स आज भी भीड़ खींचते हैं, लेकिन अब उन्हें भी अपनी स्टार पावर को एक दमदार कहानी के साथ जोड़ना होगा। कुल मिलाकर, ‘काक-वाणी’ का मानना है कि यह बदलाव हिंदी सिनेमा के सुनहरे भविष्य का संकेत है!


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कागा जी