जब सत्यजीत रे ने अपर्णा सेन को दिया ‘अंग्रेजी गुरुमंत्र’ और बदल गई भारतीय सिनेमा की किस्मत!

बॉलीवुड गलियारे में पुरानी यादों के पन्ने जब भी पलटते हैं, कुछ ऐसी अनसुनी कहानियां सामने आती हैं जो सीधे दिल को छू जाती हैं। ‘काक-वाणी’ के आज के इस कड़क चाय वाले बुलेटिन में हम आपके लिए लाए हैं एक ऐसी ही दिलचस्प और अनमोल दास्तान। यह कहानी है भारतीय सिनेमा के दो सबसे बड़े दिग्गजों—ऑस्कर विजेता महान फिल्मकार सत्यजीत रे और बेहतरीन अभिनेत्री-निर्देशक अपर्णा सेन की।

सत्यजीत रे की वो एक सलाह जिसने बदला इतिहास

क्या आप जानते हैं कि अपर्णा सेन को कैमरे के पीछे जाने यानी निर्देशन की दुनिया में कदम रखने की प्रेरणा कहां से मिली? इसका पूरा श्रेय जाता है सत्यजीत रे को। अपर्णा सेन ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत सत्यजीत रे की क्लासिक फिल्म ‘तीन कन्या’ से की थी, इसलिए वे रे को अपना गुरु और मार्गदर्शक मानती थीं।

एक बार बातचीत के दौरान सत्यजीत रे ने अपर्णा से एक ऐसी बात कही जो उनके दिल में घर कर गई। रे ने कहा था, “अब भारत के लिए अंग्रेजी भाषा में फिल्में बनाने का सही समय आ गया है।” उस दौर में यह एक बहुत ही क्रांतिकारी विचार था। रे साहब का मानना था कि भारत के अंग्रेजी बोलने वाले मध्यम वर्ग की संवेदनाओं और उनकी कहानियों को भी पर्दे पर जगह मिलनी चाहिए। इस एक जादुई सलाह ने अपर्णा सेन के भीतर छिपे निर्देशक को जगा दिया।

और बन गई आइकॉनिक ’36 चौरंगी लेन’

सत्यजीत रे की इस सलाह को गुरुमंत्र मानकर अपर्णा सेन ने अपनी पहली फिल्म की पटकथा लिखी, जिसका नाम था ’36 चौरंगी लेन’ (36 Chowringhee Lane)। यह फिल्म पूरी तरह से अंग्रेजी में थी। जब अपर्णा अपनी लिखी स्क्रिप्ट लेकर घबराते हुए सत्यजीत रे के पास गईं, तो रे ने न सिर्फ स्क्रिप्ट की सराहना की बल्कि फिल्म के लिए प्रोड्यूसर ढूंढने में भी मदद की। उन्होंने खुद दिग्गज अभिनेता शशि कपूर को पत्र लिखकर इस फिल्म को प्रोड्यूस करने की सिफारिश की थी।

शशि कपूर को भी स्क्रिप्ट बेहद पसंद आई और उन्होंने फिल्म का निर्माण किया। जब 1981 में यह फिल्म रिलीज हुई, तो इसने भारतीय सिनेमा में तहलका मचा दिया। अपर्णा सेन को अपनी पहली ही फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया।

काक-वाणी की बात

आज के दौर में भले ही पैन-इंडिया और ग्लोबल सिनेमा का शोर हो, लेकिन दशकों पहले सत्यजीत रे के उस विजन और अपर्णा सेन के साहस ने भारतीय अंग्रेजी सिनेमा की मजबूत नींव रख दी थी। तो दोस्तों, कैसी लगी आपको ‘काक-वाणी’ की यह फिल्मी उड़ान? सिनेमा की ऐसी ही चटपटी और ज्ञानवर्धक खबरों के लिए बने रहिए हमारे साथ!


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कागा जी