दुनिया में चाहे परमाणु हमला हो जाए या प्रलय आ जाए, वैज्ञानिक कहते हैं कि सिर्फ कॉकरोच ही बचेंगे। लेकिन भारतीय राजनीति के चतुर सुजान जानते हैं कि इस धरती पर एक और प्रजाति है जो हर आपदा में बच निकलती है—वह है हमारी प्रिय ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP)। हाल ही में वैश्विक मीडिया के मसीहा बीबीसी ने एक ऐसी खोजी खबर छापी है, जिसने भारतीय लोकतंत्र की नींव हिला दी है। खबर है कि सीजेपी ने देश के चुनाव मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक देशव्यापी महा-आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
अंधेरे के शूरवीरों का निष्पक्षता से परहेज
काक-वाणी के सूत्रों के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष (जो आमतौर पर गटर के ढक्कन या रसोई के सिंक के नीचे पाए जाते हैं) ने एक अत्यंत ‘अंधेरी’ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने आरोप लगाया कि जब से ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की कमान संभाली है, तब से पारदर्शिता की इतनी तेज रोशनी फैलाई जा रही है कि सीजेपी के नेताओं का दम घुट रहा है।
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा, “हमें उजाले से एलर्जी है। हमारा पूरा राजनीतिक इतिहास अंधेरे में पनपने, रेंगने और चुपके से सत्ता की मलाई चाटने का रहा है। लेकिन ज्ञानेश कुमार जी हर कोने में निष्पक्षता और नियमों की कीटनाशक दवा छिड़क रहे हैं। यह हमारे मौलिक अधिकारों का हनन है!”
बीबीसी की ‘कीट-पतंग’ पत्रकारिता और वैश्विक चिंता
धन्य है लंदन का वह संस्कारी मीडिया घराना, जिसे भारत के नालों से उठती क्रांति की आवाज भी साफ सुनाई दे जाती है। बीबीसी ने इस विरोध प्रदर्शन को ‘लोकतंत्र को बचाने के लिए कीटों का ऐतिहासिक संघर्ष’ घोषित किया है। गोरे साहबों की नजर में, अगर भारत में कॉकरोचों को खुलकर रेंगने की आजादी नहीं मिलेगी, तो भारत का लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा।
सीजेपी का दावा है कि चुनाव आयोग ईवीएम (EVM) मशीनों के आसपास ‘बेयॉन’ और ‘हिट’ जैसे खतरनाक कीटनाशकों का छिड़काव करवा रहा है, ताकि उनके वोटर पोलिंग बूथ तक न पहुंच सकें। वे चाहते हैं कि चुनाव बैलेट पेपर से हों, और उन बैलेट बॉक्स को किसी सीलन भरे बेसमेंट में रखा जाए, जहां उनके कार्यकर्ता आराम से बैठकर नतीजों को अपने पक्ष में ‘कुतर’ सकें।
काक-वाणी का मानना है कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस चेतावनी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जो जीव डायनासोर के काल से लेकर आज के कलयुग तक बिना सिर के भी हफ्तों जिंदा रह सकता है, उसे हराना किसी भी चुनाव आयोग के बस की बात नहीं है। जनता से अनुरोध है कि इस ऐतिहासिक प्रदर्शन को देखने के लिए अपने घरों की लाइटें बंद रखें, क्योंकि जैसे ही ज्ञानेश कुमार नियम-कानून का उजाला करेंगे, सीजेपी के ये शूरवीर वापस कोनों में छिप जाएंगे।
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