प्रणाम दीदी-भैया और फूफा जी लोग! ‘काक-वाणी’ के ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ विभाग में आपका हार्दिक स्वागत है। यह एक ऐसा पावन डिजिटल मंच है, जहां विज्ञान घुटने टेक देता है, इतिहास रोज सुबह नया रूप धारण करता है और बुद्धिजीवी लोग अपना सिर पकड़कर बैठ जाते हैं। हमारे देश में जब तक सुबह-सुबह किसी चमकदार फूल की तस्वीर के साथ ‘इस संदेश को 11 लोगों को भेजें, शाम तक खुशखबरी मिलेगी’ वाला मैसेज न आए, तब तक लोगों की चाय नहीं पचती।
यूनेस्को के पास अब कोई काम नहीं बचा है!
व्हाट्सएप के ज्ञानी एडमिनों की मानें तो यूनेस्को (UNESCO) संस्था की स्थापना ही इसलिए की गई थी ताकि वह भारतीय राष्ट्रगान, हमारे सिक्कों और हमारी संस्कृति को हर दूसरे हफ्ते ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ’ घोषित कर सके। हर सोमवार सुबह पेरिस में यूनेस्को के अधिकारियों की एक बैठक होती है, जिसका एकमात्र एजेंडा होता है—”आज भारत के किस मंदिर या सड़क को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ धरोहर बताना है?” हालांकि, जब आप यूनेस्को की असली वेबसाइट पर जाएंगे, तो वहां ऐसा कोई जिक्र नहीं मिलेगा। लेकिन छोड़िए, वेबसाइट चलाने वालों को क्या ही पता, असली सच तो हमारे चचा के साले के व्हाट्सएप स्टेटस पर है!
नासा की अनोखी भविष्यवाणियां और मुफ्त रिचार्ज का लालच
यूनेस्को से थक जाएं तो नासा (NASA) के पास चलिए। नासा के वैज्ञानिक अंतरिक्ष की खोज छोड़कर केवल इस बात पर रिसर्च करते हैं कि दिवाली की रात भारत ऊपर से कैसा दिखता है। हर साल वही रंग-बिरंगी रोशनी वाली फोटो ‘नासा द्वारा जारी’ बताकर वायरल की जाती है, जो वास्तव में किसी नौसिखिए ग्राफिक डिजाइनर का कमाल होती है। इसके अलावा, मुकेश अंबानी के जन्मदिन पर मुफ्त में ‘तीन महीने का रिचार्ज’ बांटने वाले लिंक पर क्लिक करते ही भले आपका फोन रिचार्ज न हो, लेकिन आपके बैंक खाते का सारा बैलेंस जरूर किसी हैकर के पास ‘रिचार्ज’ हो जाता है।
अचूक घरेलू नुस्खों के ‘एमबीबीएस’ डॉक्टर
इस यूनिवर्सिटी में ऐसे डॉक्टरों की भरमार है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज नींबू-पानी और गरम पानी से चुटकियों में कर देते हैं। मेडिकल साइंस ने सालों रिसर्च करके जो दवाइयां बनाई हैं, उन्हें व्हाट्सएप के ये वैज्ञानिक एक ही फॉरवर्ड में ‘जहर’ साबित कर देते हैं। बस सुबह उठकर पत्ता चबाइए, दोपहर को हल्दी पानी पीजिए और शाम तक अमर होने का सर्टिफिकेट पाइए!
निष्कर्ष: दिमाग मत लगाइए, बस फॉरवर्ड कीजिए!
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का नियम बेहद सरल है—सत्य की खोज में समय बर्बाद न करें। सच जानने में मेहनत लगती है, जबकि झूठ फैलाने में केवल एक अंगूठे का स्पर्श। इसलिए जैसे ही कोई चमत्कारी या डराने वाला मैसेज आए, उसे ‘Forwarded many times’ के टैग के साथ पूरे परिवार के ग्रुप में भेज दीजिए। आखिर फूफा जी को भी तो लगना चाहिए कि देश के विकास की असली चिंता सिर्फ उन्हीं को है!